लक्ष्मी चालीसा — अर्थ सहित

श्री लक्ष्मी चालीसा माँ लक्ष्मी की स्तुति है, जो 'सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही' से शुरू होती है। इसके दोहों और अंतिम चौपाई में रामदास का नाम आता है। इसमें समुद्र मंथन से माँ के प्रकट होने और हर अवतार में विष्णु की सेवा करने का वर्णन है। शुक्रवार, दिवाली और शरद पूर्णिमा पर इसका पाठ विशेष माना जाता है।

40 चौपाई, 3 दोहे, 1 सोरठा · लगभग 8 मिनट

॥ दोहा ॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥

॥ दोहा ॥

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूं। सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

॥ चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही॥

॥ चौपाई ॥

तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥

॥ चौपाई ॥

तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥

॥ चौपाई ॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥

॥ चौपाई ॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥

॥ चौपाई ॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥

॥ चौपाई ॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

॥ चौपाई ॥

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥

॥ चौपाई ॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥

॥ चौपाई ॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥

॥ चौपाई ॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

॥ चौपाई ॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

॥ चौपाई ॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

॥ चौपाई ॥

अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

॥ चौपाई ॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥

॥ चौपाई ॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥

॥ चौपाई ॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मन लाई॥

॥ चौपाई ॥

और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥

॥ चौपाई ॥

ताको कोई कष्ट न होई। मन इच्छित पावै फल सोई॥

॥ चौपाई ॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

॥ चौपाई ॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

॥ चौपाई ॥

ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥

॥ चौपाई ॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥

॥ चौपाई ॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥

॥ चौपाई ॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

॥ चौपाई ॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥

॥ चौपाई ॥

बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

॥ चौपाई ॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥

॥ चौपाई ॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

॥ चौपाई ॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥

॥ चौपाई ॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥

॥ चौपाई ॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

॥ चौपाई ॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दीजै दशा निहारी॥

॥ चौपाई ॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥

॥ चौपाई ॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥

॥ चौपाई ॥

रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

॥ चौपाई ॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥

॥ चौपाई ॥

रामदास अब कहै पुकारी। करो दूर तुम विपति हमारी॥

॥ दोहा ॥

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥

॥ दोहा ॥

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी चालीसा किस दिन पढ़नी चाहिए?

शुक्रवार माँ लक्ष्मी का दिन माना जाता है, इसलिए बहुत से भक्त शुक्रवार को पाठ करते हैं। दिवाली, धनतेरस और शरद पूर्णिमा पर भी इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है। वैसे इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ कैसे करें?

घर और पूजा स्थान साफ़ रखें, स्नान के बाद माँ के सामने घी का दीप जलाएँ, फूल और मिठाई चढ़ाएँ और शांत मन से पाठ करें। अंत में 'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाना आम परंपरा है।

क्या लक्ष्मी चालीसा पढ़ने से धन मिलता है?

चालीसा में सुख-संपत्ति की बात कही गई है, और भक्त मानते हैं कि श्रद्धा से पाठ करने पर माँ की कृपा मिलती है। पर परंपरा यह भी सिखाती है कि लक्ष्मी ईमानदार मेहनत, सफ़ाई और अच्छे आचरण वाले घर में बसती हैं — पाठ इन्हीं के साथ किया जाए।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार