पुरुष सूक्तम् — अर्थ सहित

पुरुष सूक्त ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 90) का प्रसिद्ध सूक्त है, जिसके ऋषि नारायण माने जाते हैं। इसमें हज़ारों सिर, आँखों और पैरों वाले विराट पुरुष का वर्णन है, जिनसे सारी सृष्टि बनी। विष्णु पूजा, अभिषेक और सत्यनारायण पूजा में इसका पाठ होता है।

16 मंत्र · लगभग 5 मिनट

सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥१॥

पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्। उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति॥२॥

एतावानस्य महिमातो ज्यायांश्च पूरुषः। पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि॥३॥

त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवत्पुनः। ततो विष्वङ् व्यक्रामत्साशनानशने अभि॥४॥

तस्माद्विराळजायत विराजो अधि पूरुषः। स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्भूमिमथो पुरः॥५॥

यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत। वसन्तो अस्यासीदाज्यं ग्रीष्म इध्मः शरद्धविः॥६॥

तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन्पुरुषं जातमग्रतः। तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये॥७॥

तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः सम्भृतं पृषदाज्यम्। पशून्ताँश्चक्रे वायव्यानारण्यान्ग्राम्याश्च ये॥८॥

तस्माद्यज्ञात्सर्वहुत ऋचः सामानि जज्ञिरे। छन्दांसि जज्ञिरे तस्माद्यजुस्तस्मादजायत॥९॥

तस्मादश्वा अजायन्त ये के चोभयादतः। गावो ह जज्ञिरे तस्मात्तस्माज्जाता अजावयः॥१०॥

यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन्। मुखं किमस्य कौ बाहू का ऊरू पादा उच्येते॥११॥

ब्राह्मणोऽस्य मुखमासीद्बाहू राजन्यः कृतः। ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रो अजायत॥१२॥

चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत। मुखादिन्द्रश्चाग्निश्च प्राणाद्वायुरजायत॥१३॥

नाभ्या आसीदन्तरिक्षं शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत। पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात्तथा लोकाँ अकल्पयन्॥१४॥

सप्तास्यासन्परिधयस्त्रिः सप्त समिधः कृताः। देवा यद्यज्ञं तन्वाना अबध्नन्पुरुषं पशुम्॥१५॥

यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्। ते ह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः॥१६॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरुष सूक्त का पाठ कब करें?

विष्णु और नारायण की पूजा, अभिषेक, सत्यनारायण कथा, गृह प्रवेश और यज्ञ में इसका पाठ होता है। एकादशी और गुरुवार को भी भक्त इसे पढ़ते हैं।

पुरुष सूक्त का पाठ कैसे करें?

यह वैदिक सूक्त है, इसलिए परंपरा में इसे स्वर (उदात्त-अनुदात्त) के साथ गुरु से सीखकर गाया जाता है। सामान्य भक्त स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने शांत मन से साफ़ उच्चारण के साथ पढ़ सकते हैं।

पुरुष सूक्त किस वेद में है?

यह ऋग्वेद के दसवें मंडल का 90वाँ सूक्त है। थोड़े अंतर के साथ यह यजुर्वेद और अथर्ववेद में भी मिलता है; दक्षिण भारत में तैत्तिरीय आरण्यक वाला रूप भी गाया जाता है।

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