नृसिंह भगवान की आरती — अर्थ सहित
भगवान नृसिंह विष्णु के चौथे अवतार हैं जो आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। नृसिंह जयंती पर उनकी आरती विशेष रूप से गाई जाती है।
जय नृसिंह प्रभु, जय नृसिंह प्रभु। आनंद नृसिंह प्रभु, जय जय नृसिंह प्रभु॥
नरहरि रूप धरा हरि ने, प्रह्लाद बचाया। हिरण्यकश्यप का नाशक, स्तंभ से प्रकटाया॥
ऊग्र रूप लखि देवता, सभी डर भागे। लक्ष्मी जी स्तुति करती, शरण में आगे॥
भक्त प्रह्लाद की पुकार, सुनी हरि ने आकर। विपदा से उबारा उसको, कृपा है अपार॥
नृसिंह जयंती पर, दर्शन को आए। भक्तों के सब दुख हरके, आनंद दिलाए॥
अर्थ
पद 1
जय नृसिंह प्रभु, जय नृसिंह प्रभु। आनंद नृसिंह प्रभु, जय जय नृसिंह प्रभु॥
हे नृसिंह प्रभु, आपकी जय हो। आनंदस्वरूप नृसिंह प्रभु, बार-बार आपकी जय हो।
पद 2
नरहरि रूप धरा हरि ने, प्रह्लाद बचाया। हिरण्यकश्यप का नाशक, स्तंभ से प्रकटाया॥
भगवान हरि ने नरहरि रूप धारण कर प्रह्लाद को बचाया। हिरण्यकश्यप का नाश करने के लिए वे खंभे से प्रकट हुए।
पद 3
ऊग्र रूप लखि देवता, सभी डर भागे। लक्ष्मी जी स्तुति करती, शरण में आगे॥
उनका उग्र रूप देखकर देवता भी भय से दूर हट गए। लक्ष्मी जी स्तुति करती हुई उनकी शरण में आगे बढ़ीं।
पद 4
भक्त प्रह्लाद की पुकार, सुनी हरि ने आकर। विपदा से उबारा उसको, कृपा है अपार॥
भक्त प्रह्लाद की पुकार सुनकर हरि आए और उसे संकट से उबारा। उनकी कृपा अपार है।
पद 5
नृसिंह जयंती पर, दर्शन को आए। भक्तों के सब दुख हरके, आनंद दिलाए॥
नृसिंह जयंती पर दर्शन देने के लिए आएं। भक्तों के सभी दुख हरकर उन्हें आनंद दिलाएं।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नृसिंह जयंती कब होती है?
नृसिंह जयंती वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान नृसिंह प्रकट हुए थे।
नृसिंह अवतार क्यों हुआ?
भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए और दैत्यराज हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप धारण किया।
नृसिंह भगवान की पूजा के लिए कौन सा दिन है?
नृसिंह जयंती, अक्षय तृतीया और शुक्रवार को नृसिंह पूजा की जाती है। वे विष्णु के अवतार हैं इसलिए एकादशी भी शुभ है।