नृसिंह भगवान की आरती — अर्थ सहित

भगवान नृसिंह विष्णु के चौथे अवतार हैं जो आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। नृसिंह जयंती पर उनकी आरती विशेष रूप से गाई जाती है।

5 पद · लगभग 3 मिनट

जय नृसिंह प्रभु, जय नृसिंह प्रभु। आनंद नृसिंह प्रभु, जय जय नृसिंह प्रभु॥

नरहरि रूप धरा हरि ने, प्रह्लाद बचाया। हिरण्यकश्यप का नाशक, स्तंभ से प्रकटाया॥

ऊग्र रूप लखि देवता, सभी डर भागे। लक्ष्मी जी स्तुति करती, शरण में आगे॥

भक्त प्रह्लाद की पुकार, सुनी हरि ने आकर। विपदा से उबारा उसको, कृपा है अपार॥

नृसिंह जयंती पर, दर्शन को आए। भक्तों के सब दुख हरके, आनंद दिलाए॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नृसिंह जयंती कब होती है?

नृसिंह जयंती वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान नृसिंह प्रकट हुए थे।

नृसिंह अवतार क्यों हुआ?

भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए और दैत्यराज हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप धारण किया।

नृसिंह भगवान की पूजा के लिए कौन सा दिन है?

नृसिंह जयंती, अक्षय तृतीया और शुक्रवार को नृसिंह पूजा की जाती है। वे विष्णु के अवतार हैं इसलिए एकादशी भी शुभ है।

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