हनुमान स्तवन (प्रनवउँ पवनकुमार) — अर्थ सहित

हनुमान स्तवन छोटी-सी स्तुति है, जो अक्सर हनुमान चालीसा से पहले गाई जाती है। इसकी शुरुआत रामचरितमानस के बालकांड के सोरठे 'प्रनवउँ पवनकुमार' से होती है, फिर 'अतुलितबलधामं' जैसे प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक आते हैं। मंगलवार और शनिवार की पूजा में इसका पाठ आम है।

1 सोरठा + 6 श्लोक · लगभग 3 मिनट

॥ दोहा ॥

प्रनवउँ पवनकुमार, खल बन पावक ग्यानघन। जासु हृदय आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम्। रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम्॥

अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम्। कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लङ्काभयङ्करम्॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

आञ्जनेयमतिपाटलाननं काञ्चनाद्रिकमनीयविग्रहम्। पारिजाततरुमूलवासिनं भावयामि पवमाननन्दनम्॥

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम्। बाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान स्तवन कब पढ़ा जाता है?

आमतौर पर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड के पाठ से पहले, और मंगलवार-शनिवार की पूजा में। इसे सुबह या शाम किसी भी समय पढ़ा जा सकता है।

'प्रनवउँ पवनकुमार' कहाँ से है?

यह गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के बालकांड का सोरठा है। 'अतुलितबलधामं' श्लोक सुंदरकांड के आरंभ में आता है; बाकी श्लोक परंपरा से प्रचलित संस्कृत स्तुतियाँ हैं।

क्या हनुमान स्तवन और हनुमान चालीसा एक ही हैं?

नहीं। हनुमान स्तवन कुछ श्लोकों की छोटी स्तुति है, जबकि हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयाँ और दोहे हैं। कई भक्त दोनों को साथ पढ़ते हैं।

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