मनोजवं मारुततुल्यवेगं — हनुमान मंत्र अर्थ सहित

यह हनुमान जी का बहुत प्रसिद्ध श्लोक है, जिसमें उनके गुणों का वर्णन करके उनकी शरण ली जाती है। हनुमान जी मन जैसे तेज़, वायु जैसे वेगवान, इंद्रियों को जीतने वाले और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं। रामायण पाठ या हनुमान पूजा से पहले इसे बोला जाता है।

1 श्लोक · 108 जप ≈ 12 मिनट

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोजवं मंत्र कितनी बार बोलें?

रोज़ 1, 11 या 21 बार बोल सकते हैं। जप के रूप में 108 बार (एक माला) किया जाता है।

यह मंत्र कब बोलना चाहिए?

सुबह स्नान के बाद, मंगलवार और शनिवार को, हनुमान जयंती पर, और रामायण या सुंदरकांड पाठ से पहले।

'मनोजवं' का अर्थ क्या है?

'मनो' यानी मन और 'जव' यानी गति — जिनकी गति मन जितनी तेज़ है। यह हनुमान जी की अद्भुत शक्ति और फुर्ती को बताता है।

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