रुद्राक्ष कैसे धारण करें: सही दिन, मंत्र और नियम

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संक्षेप में: परंपरा के अनुसार रुद्राक्ष सोमवार, महाशिवरात्रि या सावन के महीने में धारण किया जाता है। रुद्राक्ष को साफ़ पानी या गंगाजल से धोएँ, भगवान शिव के सामने रखें, 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप करें, और फिर लाल या पीले धागे में, या चाँदी-सोने में गले या कलाई पर पहनें। पंचमुखी (पाँच मुखी) रुद्राक्ष सबसे आम है और सबके लिए उपयुक्त माना जाता है।

एक नज़र में

सही दिन
सोमवार, महाशिवरात्रि या सावन
मंत्र
ॐ नमः शिवाय, 108 बार
धागा
लाल या पीला धागा, या चाँदी/सोना
सबसे आम
पंचमुखी (5 मुखी)
देवता
भगवान शिव

रुद्राक्ष क्या है

रुद्राक्ष एलियोकार्पस पेड़ का सूखा बीज है, जो हिमालय की तराई, नेपाल और इंडोनेशिया में उगता है। 'रुद्राक्ष' का अर्थ है 'रुद्र (शिव) की आँख' या 'शिव के आँसू'। मनके पर बनी प्राकृतिक धारियों को मुखी कहते हैं; एक रुद्राक्ष में 1 से 21 तक मुखी हो सकते हैं।

रुद्राक्ष धारण करने की विधि

  1. सोमवार की सुबह चुनें, या महाशिवरात्रि या सावन का कोई दिन।
  2. स्नान करके भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने बैठें।
  3. रुद्राक्ष को साफ़ पानी या गंगाजल से धोएँ। कई परिवार इसे कच्चे दूध में डुबोकर फिर पानी से धोते हैं।
  4. फूल और दीपक के साथ रुद्राक्ष को शिवलिंग या भगवान शिव के सामने अर्पित करें।
  5. रुद्राक्ष हाथ में लेकर 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप करें (हमारे जाप काउंटर से गिन सकते हैं)।
  6. इसे गले में या दाहिनी कलाई पर ऐसे पहनें कि यह त्वचा को छूता रहे।

मुखी और उनके देवता (प्रचलित मान्यता)

  • 1 मुखी: भगवान शिव
  • 2 मुखी: अर्धनारीश्वर (शिव-पार्वती)
  • 3 मुखी: अग्नि देव
  • 4 मुखी: ब्रह्मा
  • 5 मुखी: कालाग्नि रुद्र (शिव का रूप)
  • 6 मुखी: कार्तिकेय
  • 7 मुखी: महालक्ष्मी
  • 8 मुखी: गणेश
  • 9 मुखी: दुर्गा
  • 10 मुखी: विष्णु
  • 11 मुखी: हनुमान (एकादश रुद्र)
  • 12 मुखी: सूर्य
  • 13 मुखी: कामदेव / इंद्र
  • 14 मुखी: शिव (हनुमान से भी जोड़ा जाता है)

क्या करें

  • रुद्राक्ष को साफ़ रखें; कभी-कभी सादे पानी से धोकर सुखा लें।
  • हर सुबह पहनते समय 'ॐ नमः शिवाय' बोलें।
  • जब न पहनें, तो इसे साफ़ जगह, जैसे पूजा की डिब्बी में रखें।
  • भरोसेमंद विक्रेता से ही ख़रीदें; महँगे रुद्राक्ष के लिए लैब का प्रमाणपत्र माँगें।

क्या न करें (प्रचलित नियम, परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं)

  • कई लोग रात को सोने से पहले और दांपत्य संबंध से पहले रुद्राक्ष उतार देते हैं।
  • कई लोग श्मशान या अंतिम संस्कार में जाने से पहले इसे उतार देते हैं।
  • साबुन और रसायन रुद्राक्ष पर न लगने दें; साबुन से नहाते समय उतार दें।
  • अपना रुद्राक्ष किसी और को पहनने के लिए न दें।
  • रुद्राक्ष पहनते समय कई लोग मांस और शराब से दूर रहते हैं।

असली रुद्राक्ष कैसे पहचानें

पानी में तैराने या दो सिक्कों के बीच घुमाने जैसे घरेलू परीक्षण भरोसेमंद नहीं हैं। सबसे पक्का तरीक़ा जेम-टेस्टिंग लैब का एक्स-रे या प्रमाणपत्र है, जिसमें दिखता है कि अंदर बीज के खाने उतने ही हैं जितने मुखी।

ये परंपरागत नियम हैं; परिवार और गुरु के अनुसार अलग हो सकते हैं। कथामंत्र रुद्राक्ष से किसी रोग के इलाज या लाभ का दावा नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुद्राक्ष किस दिन धारण करें?

परंपरा के अनुसार सोमवार सबसे शुभ माना जाता है। महाशिवरात्रि और सावन का महीना भी बहुत शुभ माने जाते हैं।

रुद्राक्ष पहनते समय कौन सा मंत्र बोलें?

'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप सबसे आम है। हर सुबह पहनते समय भी यही मंत्र बोला जा सकता है।

शुरुआत के लिए कौन सा रुद्राक्ष ठीक है?

पंचमुखी (5 मुखी) रुद्राक्ष सबसे आम है और सबके लिए उपयुक्त माना जाता है।

क्या रुद्राक्ष पहनकर सो सकते हैं?

कई लोग सोने से पहले रुद्राक्ष उतारकर पूजा-स्थान पर रख देते हैं, कुछ पहने रहते हैं। रात को उतारने से धागा भी सुरक्षित रहता है।

क्या महिलाएँ रुद्राक्ष पहन सकती हैं?

हाँ, बहुत सी महिलाएँ रुद्राक्ष पहनती हैं। कुछ परिवार मासिक धर्म के दिनों में इसे उतारने को कहते हैं, कुछ नहीं; अपने परिवार की परंपरा मानें।

असली रुद्राक्ष कैसे पहचानें?

घरेलू परीक्षण भरोसेमंद नहीं हैं। जेम-टेस्टिंग लैब का एक्स-रे या प्रमाणपत्र सबसे पक्का तरीक़ा है।

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