महामृत्युंजय मंत्र — अर्थ और जप विधि

भगवान शिव का यह मंत्र स्वास्थ्य, सुरक्षा और भय से मुक्ति की प्रार्थना है। सोमवार और सावन में इसका जप विशेष माना जाता है।

1 मंत्र · 108 जप ≈ 20 मिनट

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महामृत्युंजय मंत्र कब जपें?

किसी भी समय, विशेषकर सुबह, सोमवार को और सावन में। बीमारी या चिंता के समय भी लोग इसका जप करते हैं।

यह मंत्र किस वेद से है?

ऋग्वेद (मंडल 7, सूक्त 59) से; यही मंत्र यजुर्वेद में भी आता है।

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