सबरीमाला 41 दिन का व्रत: माला कैसे पहनें और क्या नियम मानें
संक्षेप में: सबरीमाला व्रत (मंडल व्रतम्) 41 दिन का व्रत है, जो केरल के सबरीमाला में भगवान अय्यप्पा के दर्शन से पहले रखा जाता है। यह गुरुस्वामी के हाथों माला पहनने से शुरू होता है। इसके बाद सादा और अनुशासित जीवन जिया जाता है: शाकाहारी भोजन, शराब और तंबाकू से दूरी, ब्रह्मचर्य, काले या नीले वस्त्र, दिन में दो बार पूजा और मीठी वाणी। माला यात्रा पूरी करके घर लौटने के बाद ही उतारी जाती है।
एक नज़र में
- अवधि
- 41 दिन (मंडल)
- माला
- रुद्राक्ष या तुलसी की माला, अय्यप्पा के लॉकेट के साथ
- वस्त्र
- काले, नीले या भगवा (काले सबसे आम)
- जाप
- स्वामिये शरणम् अय्यप्पा
- मौसम
- मंडल–मकरविलक्कु, लगभग मध्य नवंबर से मध्य जनवरी
व्रत कब शुरू करें
ज़्यादातर भक्त मलयालम महीने वृश्चिकम् के पहले दिन (मध्य नवंबर) से व्रत शुरू करते हैं, जब मंडल काल शुरू होता है। या फिर अपनी यात्रा से कम से कम 41 दिन पहले। शुभ दिन अपने गुरुस्वामी से पूछकर चुनें। पहली बार जाने वाले भक्त (कन्नि स्वामी) से पूरे 41 दिन का व्रत रखने की अपेक्षा की जाती है।
माला कैसे धारण करें (माला धारण विधि)
- सुबह स्नान करके साफ़ काले या नीले वस्त्र पहनें।
- गुरुस्वामी के साथ मंदिर (हो सके तो अय्यप्पा मंदिर) या घर के पूजा-स्थान पर जाएँ।
- दीपक और फूलों के साथ माला भगवान अय्यप्पा को अर्पित करें; गुरुस्वामी माला को आशीर्वाद देते हैं।
- प्रार्थना करते हुए गुरुस्वामी, मंदिर के पुजारी या कई परिवारों में माँ आपको माला पहनाती हैं।
- गुरुस्वामी के पैर छूकर आशीर्वाद लें। अब से आपको 'स्वामी' कहकर बुलाया जाता है, और आप भी दूसरे भक्तों को 'स्वामी' कहते हैं।
व्रत के दौरान रोज़ की दिनचर्या
- दिन में दो बार, सुबह और शाम, पूजा से पहले स्नान करें।
- सुबह-शाम दीपक जलाकर 'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' का जाप करें; कई भक्त अय्यप्पा के 108 शरण नाम भी बोलते हैं।
- जब हो सके, मंदिर जाएँ और सामूहिक भजन में शामिल हों।
- माला हर समय पहने रहें, सोते समय भी।
क्या करें
- सादा शाकाहारी (सात्विक) भोजन करें, हो सके तो घर का बना।
- पूरे 41 दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- धीरे और प्रेम से बोलें, शांत रहें, बहस से बचें।
- हर व्यक्ति में अय्यप्पा को देखें और उसे 'स्वामी' कहकर बुलाएँ।
- हो सके तो चटाई या ज़मीन पर सोएँ।
- दूसरों की मदद करें और हो सके तो अन्नदान करें।
क्या न करें
- मांस, मछली, अंडा, शराब, तंबाकू या कोई भी नशा न करें।
- कई भक्त प्याज़ और लहसुन भी नहीं खाते।
- कई भक्त दाढ़ी नहीं बनाते, बाल नहीं कटवाते और नाख़ून नहीं काटते।
- जहाँ हो सके, जूते-चप्पल न पहनें (यह एक आम परंपरा है)।
- क्रोध, झूठ, अपशब्द और निंदा से दूर रहें।
- जिस घर में जन्म या मृत्यु हुई हो, वहाँ के कार्यक्रमों से बचें। अपने परिवार में ऐसा हो तो गुरुस्वामी से सलाह लें।
इरुमुडी केट्टु क्या है
इरुमुडी कपड़े की दो हिस्सों वाली पोटली है, जिसे भक्त सिर पर रखकर ले जाते हैं। आगे वाले हिस्से में भगवान अय्यप्पा के लिए भेंट होती है, जिसमें घी से भरा नारियल (नेय्य-तेंगा) भी होता है; पीछे वाले हिस्से में यात्रा का सामान होता है। इसे गुरुस्वामी 'केट्टुनिरा' नाम की छोटी पूजा में बाँधते हैं। परंपरा के अनुसार केवल इरुमुडी लेकर आए भक्त ही 18 पवित्र सीढ़ियाँ (पदिनेट्टाम पडि) चढ़ते हैं।
माला कब और कैसे उतारें
यात्रा पूरी करके घर लौटने के बाद स्नान करें, अपने परिवार की परंपरा के अनुसार भगवान अय्यप्पा के सामने दीपक जलाएँ या नारियल फोड़ें, और फिर घर के पूजा-स्थान या मंदिर में माला उतारें। कई भक्त यह गुरुस्वामी की उपस्थिति में करते हैं। माला अगले वर्ष के लिए सँभालकर रखें या मंदिर में अर्पित करें।
परंपराएँ परिवार और गुरुस्वामी के अनुसार अलग हो सकती हैं; अपने गुरुस्वामी की बात मानें। दर्शन के लिए सबरीमाला की आधिकारिक वर्चुअल क्यू में बुकिंग ज़रूरी है। ताज़ा तारीख़ें और नियम sabarimalaonline.org और त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड से देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सबरीमाला व्रत कितने दिन का होता है?
परंपरा के अनुसार 41 दिन, जिसे मंडल व्रतम् कहते हैं। कई भक्त वृश्चिकम् महीने के पहले दिन (मध्य नवंबर) से शुरू करते हैं।
क्या मैं ख़ुद माला पहन सकता हूँ?
परंपरा है कि गुरुस्वामी या मंदिर के पुजारी माला पहनाएँ। जहाँ यह संभव न हो, वहाँ कई भक्त घर के पूजा-स्थान पर अय्यप्पा से प्रार्थना करते हुए माँ या किसी बड़े से माला पहनते हैं।
कन्नि स्वामी किसे कहते हैं?
जो भक्त पहली बार सबरीमाला जा रहा हो, उसे कन्नि स्वामी कहते हैं। उससे पूरे 41 दिन का व्रत रखने की अपेक्षा की जाती है।
व्रत में कौन सा मंत्र जपें?
सबसे आम जाप है 'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा'। कई भक्त सुबह-शाम अय्यप्पा के 108 शरण नाम भी बोलते हैं।
क्या व्रत में प्याज़ और लहसुन खा सकते हैं?
सात्विक भोजन के नियम के कारण कई भक्त प्याज़ और लहसुन नहीं खाते। मांस, मछली, अंडा और शराब से सभी व्रती दूर रहते हैं।
माला कब उतारी जाती है?
यात्रा पूरी करके घर लौटने के बाद ही, घर के पूजा-स्थान या मंदिर में प्रार्थना के साथ।