तुलसी मंत्र — अर्थ सहित

हिंदू घरों में तुलसी को माता और भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। रोज़ सुबह तुलसी को जल चढ़ाते समय और शाम को दीपक जलाते समय यह मंत्र बोला जाता है। इसमें तुलसी माता को वृंदा, केशव की प्रिया और विष्णु भक्ति देने वाली देवी कहकर प्रणाम किया गया है।

2 श्लोक · 1 मिनट से कम

वृन्दायै तुलसीदेव्यै प्रियायै केशवस्य च। विष्णुभक्तिप्रदे देवि सत्यवत्यै नमो नमः॥

महाप्रसादजननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी। आधिव्याधिहरा नित्यं तुलसि त्वां नमोऽस्तु ते॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी मंत्र कब बोलना चाहिए?

सुबह स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ाते समय, शाम को तुलसी के पास दीपक जलाते समय, और तुलसी विवाह (देवउठनी एकादशी) पर।

तुलसी की परिक्रमा कितनी बार करें?

परंपरा में मंत्र बोलते हुए तुलसी की 3 या 7 परिक्रमा की जाती है। मंत्र एक या तीन बार बोलना काफ़ी है।

तुलसी को 'वृंदा' क्यों कहते हैं?

पुराणों की कथा के अनुसार तुलसी पूर्व जन्म में वृंदा नाम की पतिव्रता स्त्री थीं। वृंदावन का नाम भी तुलसी (वृंदा) के वन से जुड़ा माना जाता है।

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