तुलसी चालीसा — अर्थ सहित

तुलसी देवी भगवान विष्णु की परम प्रिया हैं। वे 'वृंदा', 'वैष्णवी' और 'विष्णुप्रिया' नामों से भी जानी जाती हैं। तुलसी का पौधा घर में रखने और प्रतिदिन पूजन करने से घर में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

40 चौपाई · लगभग 10 मिनट

॥ दोहा ॥

जय तुलसी जग जननी, विष्णुप्रिया सुखदान। वृन्दावन में राजती, करो भक्त कल्याण॥

॥ दोहा ॥

नमामि तुलसी माता, शालिग्राम-प्रिये। देव ऋषि मुनि वंदित, पूजित सर्वत्र पिये॥

॥ चौपाई ॥

जय जय तुलसी देव सुहावन। हरि-मन-प्रिय जग-हित-पावन। ब्रह्मा विष्णु महेश मनावें। इंद्रादि सुर तव पद ध्यावें॥

॥ चौपाई ॥

वृन्दावन में तुम राज करो। राधा-कृष्ण की सेवा करो। वृन्दा नाम धारण करती हो। भक्तों की पीड़ा हरती हो॥

॥ चौपाई ॥

जलन्धर की प्रिय पत्नी थी। सती वृन्दा परम सती थी। विष्णु माया से भ्रमित हुई। शाप देकर तुलसी हुई॥

॥ चौपाई ॥

विष्णु ने वरदान दिया ऐसा। शालिग्राम रूप प्रिय जैसा। तुलसी बिन हरि पूजा नाहीं। तुलसी दल नहीं तो पूजा नाहीं॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी के पत्ते हैं पावन। दर्शन मात्र से दुख है छावन। स्पर्श करने से पाप कटे हैं। सभी रोग दुख से वो हटे हैं॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी जल से करें स्नान। मिलता है हरि का वरदान। तुलसी पत्र मृत मुख धरे। वैकुण्ठ लोक को वो सुधरे॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी वन में आता राम। भक्तों की सुनते हैं राम। तुलसी की माला जो जपे। राम नाम मन में वो थपे॥

॥ चौपाई ॥

कार्तिक में पूजा करो। द्वादशी को दीपक जलाओ। विवाह तुलसी-शालिग्राम का। मिटे दोष हर जनम-जनम का॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी घर में लगाएं जो। लक्ष्मी घर में आएं जो। घर में कभी कलह न होगी। शांति और सुख की धारा होगी॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी के तले बैठकर जो। राम नाम जपते रहो जो। मुक्ति का द्वार खुल जाएगा। विष्णु-पद जीव पाएगा॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी की सेवा जो करे। भव-सागर से वो तर जाए। रोज पानी देकर पूजे। कृपा विष्णु की वो पावे॥

॥ चौपाई ॥

देव गन्धर्व ऋषि मुनि आते। तुलसी दर्शन करके जाते। शिव भी करते तुलसी पूजन। सभी देव मानते तुलसी जन॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी की माला मनका माला। राम भक्तों की जप-माला। एक-एक मनका जपते जाएं। राम लोक में स्थान पाएं॥

॥ चौपाई ॥

तुलसी चालीसा जो पढ़े। विष्णु-कृपा से रहे बढ़े। घर में आवे सुख-समृद्धि। तुलसी दे मन को बुद्धि॥

॥ दोहा ॥

तुलसी चरण नमो नमो, करो सदा कल्याण। हरि-कृपा का द्वार हो, दो मोक्ष का वरदान॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी की पूजा कब करें?

तुलसी की पूजा सुबह और शाम, विशेषकर एकादशी और कार्तिक महीने में करें। कार्तिक शुक्ल द्वादशी को तुलसी-शालिग्राम विवाह महोत्सव मनाया जाता है।

तुलसी की माला से जप क्यों करते हैं?

तुलसी की माला विष्णु और राम भक्तों के लिए पवित्र मानी जाती है। इस पर जप करने से मन शुद्ध होता है और विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

तुलसी को घर में कहाँ रखें?

तुलसी को घर के आँगन में, पूर्व या उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है। तुलसी के पौधे के सामने शाम को दीपक जलाएं।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार