या कुन्देन्दुतुषारहारधवला — सरस्वती वंदना अर्थ सहित
यह विद्या, कला और वाणी की देवी माँ सरस्वती की सबसे प्रसिद्ध वंदना है। भारत के कई स्कूलों में सुबह की प्रार्थना में और बसंत पंचमी पर इसे गाया जाता है। इसमें माँ के उजले रूप, वीणा और कमल का वर्णन है, और प्रार्थना है कि वे हमारी जड़ता (आलस और अज्ञान) दूर करें।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्। हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
अर्थ
पद 1
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
जो कुंद के फूल, चंद्रमा, हिम और मोतियों के हार जैसी उजली हैं, जो सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं, जिनके हाथ में सुंदर वीणा है और जो सफ़ेद कमल पर बैठी हैं; जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि देवता सदा प्रणाम करते हैं — वे सारी जड़ता दूर करने वाली देवी सरस्वती मेरी रक्षा करें।
पद 2
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्। हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
जो उजली हैं, ब्रह्म-ज्ञान का सार हैं, आदि शक्ति हैं और पूरे जगत में व्याप्त हैं; जो वीणा और पुस्तक धारण करती हैं, अभय देती हैं और अज्ञान का अंधेरा मिटाती हैं; जिनके हाथ में स्फटिक की माला है और जो कमल के आसन पर बैठी हैं — उन बुद्धि देने वाली माँ शारदा को मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरस्वती वंदना कब गाई जाती है?
स्कूल की सुबह की प्रार्थना में, पढ़ाई शुरू करने से पहले, परीक्षा के दिनों में और विशेष रूप से बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) पर।
इसे कितनी बार पढ़ना चाहिए?
रोज़ एक बार पढ़ना काफ़ी है। चाहें तो पहला श्लोक 3 या 11 बार भी बोल सकते हैं।
'निःशेषजाड्यापहा' का क्या अर्थ है?
'जाड्य' यानी जड़ता — आलस, सुस्ती और अज्ञान। 'निःशेषजाड्यापहा' यानी जो इसे पूरी तरह दूर कर दें। यह विद्यार्थियों की सबसे बड़ी प्रार्थना है।