ॐ जय सरस्वती माता आरती — अर्थ सहित

'ॐ जय सरस्वती माता' विद्या, ज्ञान और संगीत की देवी माँ सरस्वती की लोकप्रिय आरती है। इसमें माँ के हंस वाहन, वीणा और माला का वर्णन है और उनसे अज्ञान का अँधेरा दूर करने की प्रार्थना है। बसंत पंचमी, स्कूलों की प्रार्थना सभा और संगीत साधना में यह गाई जाती है।

7 पद · लगभग 4 मिनट

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरस्वती आरती कब गानी चाहिए?

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के अंत में, नवरात्रि की सप्तमी से नवमी तक, और पढ़ाई, परीक्षा या संगीत अभ्यास शुरू करने से पहले।

माँ सरस्वती की पूजा किस दिन करें?

बसंत पंचमी उनका मुख्य पर्व है। इसके अलावा कोई तय दिन ज़रूरी नहीं — बहुत से लोग रोज़ पढ़ाई या रियाज़ से पहले उन्हें याद करते हैं।

इस आरती में मंथरा और रावण का ज़िक्र क्यों है?

परंपरा कहती है कि देवताओं की प्रार्थना पर सरस्वती ने मंथरा की बुद्धि फेर दी, जिससे राम वन गए और आगे चलकर रावण का अंत हुआ।

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