ॐ जय सरस्वती माता आरती — अर्थ सहित
'ॐ जय सरस्वती माता' विद्या, ज्ञान और संगीत की देवी माँ सरस्वती की लोकप्रिय आरती है। इसमें माँ के हंस वाहन, वीणा और माला का वर्णन है और उनसे अज्ञान का अँधेरा दूर करने की प्रार्थना है। बसंत पंचमी, स्कूलों की प्रार्थना सभा और संगीत साधना में यह गाई जाती है।
ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥
अर्थ
पद 1
ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
हे माँ सरस्वती, आपकी जय हो। आप अच्छे गुणों के वैभव से भरी हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।
पद 2
चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
आपका मुख चंद्रमा जैसा है, आप कमल पर बैठी हैं और आपकी आभा मंगल करने वाली है। शुभ हंस की सवारी आप पर सजती है और आपका तेज अतुलनीय है।
पद 3
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
आपके बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है। सिर पर मणियों वाला मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा देती है।
पद 4
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
हे देवी, जो आपकी शरण में आए, आपने उनका उद्धार किया। आप दासी मंथरा की बुद्धि में बैठीं, जिससे घटनाएँ आगे बढ़ीं और अंत में रावण का संहार हुआ।
पद 5
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
हे विद्या और ज्ञान देने वाली माँ, हमारे भीतर ज्ञान का प्रकाश भरिए। संसार से मोह, अज्ञान और अँधेरे को मिटा दीजिए।
पद 6
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
हे माँ, धूप, दीप, फल और मेवे स्वीकार कीजिए। हमें ज्ञान की आँखें दीजिए और संसार को पार लगाइए।
पद 7
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥
जो कोई माँ सरस्वती की यह आरती गाता है, उसे भलाई और सुख देने वाला ज्ञान और भक्ति मिलती है।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरस्वती आरती कब गानी चाहिए?
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के अंत में, नवरात्रि की सप्तमी से नवमी तक, और पढ़ाई, परीक्षा या संगीत अभ्यास शुरू करने से पहले।
माँ सरस्वती की पूजा किस दिन करें?
बसंत पंचमी उनका मुख्य पर्व है। इसके अलावा कोई तय दिन ज़रूरी नहीं — बहुत से लोग रोज़ पढ़ाई या रियाज़ से पहले उन्हें याद करते हैं।
इस आरती में मंथरा और रावण का ज़िक्र क्यों है?
परंपरा कहती है कि देवताओं की प्रार्थना पर सरस्वती ने मंथरा की बुद्धि फेर दी, जिससे राम वन गए और आगे चलकर रावण का अंत हुआ।