रुद्र (शिव) गायत्री मंत्र — अर्थ और जप विधि

रुद्र गायत्री (शिव गायत्री) मंत्र भगवान शिव की गायत्री छंद में प्रार्थना है, जो यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक (महानारायण उपनिषद) में आता है। इसमें शिव को तत्पुरुष और महादेव कहकर ध्यान किया जाता है। सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर इसका विशेष जप होता है।

1 मंत्र · 108 जप ≈ 12 मिनट

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुद्र (शिव) गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?

सामान्यतः 108 बार (एक माला)। शुरुआत में 11 या 21 बार से भी कर सकते हैं।

यह मंत्र कब जपना चाहिए?

सोमवार को, सावन के महीने में, प्रदोष और महाशिवरात्रि पर, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय या सुबह की पूजा में।

रुद्र गायत्री मंत्र कहाँ से है?

यह कृष्ण यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक के महानारायण उपनिषद भाग में आता है। 'तत्पुरुष' शिव के पाँच मुखों में से एक का नाम भी है।

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