सोमवार व्रत कथा — शिव जी की कहानी अर्थ सहित
सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन उपवास रखकर शिव-पार्वती की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। इस कथा में एक धनी साहूकार की पुत्री की कहानी है जो सोमवार के व्रत की महिमा से विवाह पाती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। श्रावण मास के सभी सोमवार विशेष रूप से पवित्र माने जाते हैं।
॥ दोहा ॥
जय शंकर जय गिरिजापति, जय जय सोमेश्वर। सोमवार जो व्रत करे, पावे सुख अपार॥
एक नगर में धनी साहूकार रहता था। धन-दौलत से भरा, पर पुत्री नहीं थी। शिव की भक्ति से पुत्री जन्मी सुंदर। साहूकार ने माना — यह शिव का वरदान।
पुत्री बड़ी हुई, सोमवार व्रत किया। हर सोमवार शिव-पार्वती को जल चढ़ाया। श्रद्धा से पूजा, कथा सुनी और सुनाई। शिव की कृपा से जीवन में खुशहाली आई।
राजकुमार उस नगर से गुज़रा एक दिन। पुत्री को देखा, मन में भाई छवि। विवाह हुआ, पर माता ने शर्त रखी — जन्मान्ध राजकुमार था, पत्नी भी होगी।
पुत्री ने शिव से प्रार्थना की रात को। सोमवार के व्रत की याद दिलाई भगवान को। शिव प्रकट हुए, राजकुमार को दृष्टि दी। सोमवार के व्रत की महिमा सिद्ध हुई।
॥ दोहा ॥
शिव की भक्ति जो करे, सोमवार का व्रत लाए। दुख-दरिद्रता दूर हो, मनचाहा फल पाए॥
अर्थ
दोहा
जय शंकर जय गिरिजापति, जय जय सोमेश्वर। सोमवार जो व्रत करे, पावे सुख अपार॥
हे शंकर, हे गिरिजापति, हे सोमेश्वर, आपकी जय हो। जो सोमवार का व्रत करे, उसे अपार सुख की प्राप्ति हो।
पद 1
एक नगर में धनी साहूकार रहता था। धन-दौलत से भरा, पर पुत्री नहीं थी। शिव की भक्ति से पुत्री जन्मी सुंदर। साहूकार ने माना — यह शिव का वरदान।
एक नगर में एक धनी साहूकार रहता था। धन-दौलत से भरपूर था पर संतान नहीं थी। शिव की भक्ति से उसे एक सुंदर पुत्री हुई। साहूकार ने इसे शिव का वरदान माना।
पद 2
पुत्री बड़ी हुई, सोमवार व्रत किया। हर सोमवार शिव-पार्वती को जल चढ़ाया। श्रद्धा से पूजा, कथा सुनी और सुनाई। शिव की कृपा से जीवन में खुशहाली आई।
पुत्री बड़ी हुई और सोमवार का व्रत करने लगी। हर सोमवार शिव-पार्वती को जल चढ़ाती। श्रद्धा से पूजा करती, कथा सुनती। शिव की कृपा से जीवन में खुशहाली आई।
पद 3
राजकुमार उस नगर से गुज़रा एक दिन। पुत्री को देखा, मन में भाई छवि। विवाह हुआ, पर माता ने शर्त रखी — जन्मान्ध राजकुमार था, पत्नी भी होगी।
एक दिन एक राजकुमार उस नगर से गुज़रा। उसने पुत्री को देखा और मन में भा गई। विवाह हुआ, पर माँ की शर्त थी — राजकुमार जन्म से अंधा था, और उसकी पत्नी को भी ऐसा ही होना होगा।
पद 4
पुत्री ने शिव से प्रार्थना की रात को। सोमवार के व्रत की याद दिलाई भगवान को। शिव प्रकट हुए, राजकुमार को दृष्टि दी। सोमवार के व्रत की महिमा सिद्ध हुई।
पुत्री ने रात को शिव से प्रार्थना की और सोमवार व्रत की महिमा याद दिलाई। शिव प्रकट हुए और राजकुमार को दृष्टि दे दी। इस प्रकार सोमवार व्रत की महिमा सिद्ध हुई।
दोहा
शिव की भक्ति जो करे, सोमवार का व्रत लाए। दुख-दरिद्रता दूर हो, मनचाहा फल पाए॥
जो शिव की भक्ति करे और सोमवार का व्रत रखे, उसके दुख और दरिद्रता दूर हो जाएँ और वह मनचाहा फल पाए।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोमवार व्रत में क्या खाएँ और क्या नहीं?
व्रत में फलाहार करें — फल, दूध, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू और आलू खा सकते हैं। नमक, अनाज, प्याज और लहसुन का सेवन न करें। संध्या को एक बार भोजन करने की परंपरा है।
सोमवार व्रत कितने करने चाहिए?
सामान्यतः १६ सोमवार या श्रावण मास के सभी सोमवार का व्रत रखा जाता है। कुछ लोग साल भर हर सोमवार व्रत रखते हैं। संकल्प लेकर नियमित व्रत अधिक फलदायी माना जाता है।
सोमवार व्रत किसे करना चाहिए?
कोई भी स्त्री-पुरुष यह व्रत रख सकते हैं। विशेषकर जो शीघ्र विवाह, संतान, स्वास्थ्य या करियर में सफलता चाहते हों। शिव भक्त इसे श्रद्धा से करते हैं। कोई उम्र या लिंग का प्रतिबंध नहीं है।