मङ्गलम् भगवान विष्णुः — मंत्र अर्थ सहित
यह भगवान विष्णु का एक छोटा और मधुर मंगल श्लोक है। विवाह, गृह-प्रवेश, नामकरण और हर शुभ काम की शुरुआत में इसे बोला जाता है। इसमें भगवान विष्णु को गरुड़ध्वज, कमल-नयन और मंगल का धाम कहकर याद किया गया है, ताकि सब कुछ शुभ हो।
मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः। मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलायतनं हरिः॥
अर्थ
पद 1
मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः। मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलायतनं हरिः॥
भगवान विष्णु मंगलमय हैं, गरुड़ के ध्वज वाले प्रभु मंगलमय हैं, कमल जैसी आँखों वाले मंगलमय हैं — श्री हरि सब मंगलों के धाम हैं।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मङ्गलम् भगवान विष्णुः कब बोला जाता है?
विवाह, गृह-प्रवेश, पूजा या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में। शादी के कार्ड पर भी यह श्लोक अक्सर छपा होता है।
इसे कितनी बार बोलें?
एक या तीन बार बोलना परंपरा है। चाहें तो जप के रूप में 108 बार भी कर सकते हैं।
'गरुडध्वज' और 'पुण्डरीकाक्ष' का अर्थ क्या है?
'गरुडध्वज' यानी जिनके ध्वज पर गरुड़ हैं, और 'पुण्डरीकाक्ष' यानी कमल जैसी सुंदर आँखों वाले — दोनों भगवान विष्णु के नाम हैं।