गायत्री चालीसा — अर्थ सहित

गायत्री चालीसा वेदमाता गायत्री की हिंदी स्तुति है, जिसमें दो आरंभिक दोहे, चालीस चौपाइयाँ और एक समापन दोहा हैं। इसमें गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षरों की महिमा और माँ के ज्ञानमय रूप का वर्णन है। भक्त इसे प्रायः सुबह या संध्या के समय, गायत्री मंत्र के जप के साथ पढ़ते हैं।

40 चौपाई · लगभग 8 मिनट

॥ दोहा ॥

ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शान्ति कान्ति जागृत प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥

॥ दोहा ॥

जगत जननि मंगल करनि, गायत्री सुखधाम। प्रणवों सावित्री स्वधा, स्वाहा पूरन काम॥

॥ चौपाई ॥

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी। गायत्री नित कलिमल दहनी॥

॥ चौपाई ॥

अक्षर चौविस परम पुनीता। इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता॥

॥ चौपाई ॥

शाश्वत सतोगुणी सत रूपा। सत्य सनातन सुधा अनूपा॥

॥ चौपाई ॥

हंसारूढ़ सितम्बर धारी। स्वर्ण कान्ति शुचि गगन-बिहारी॥

॥ चौपाई ॥

पुस्तक पुष्प कमण्डलु माला। शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला॥

॥ चौपाई ॥

ध्यान धरत पुलकित हित होई। सुख उपजत दुःख दुर्मति खोई॥

॥ चौपाई ॥

कामधेनु तुम सुर तरु छाया। निराकार की अद्भुत माया॥

॥ चौपाई ॥

तुम्हरी शरण गहै जो कोई। तरै सकल संकट सों सोई॥

॥ चौपाई ॥

सरस्वती लक्ष्मी तुम काली। दिपै तुम्हारी ज्योति निराली॥

॥ चौपाई ॥

तुम्हरी महिमा पार न पावैं। जो शारद शत मुख गुन गावैं॥

॥ चौपाई ॥

चार वेद की मात पुनीता। तुम ब्रह्माणी गौरी सीता॥

॥ चौपाई ॥

महामन्त्र जितने जग माहीं। कोउ गायत्री सम नाहीं॥

॥ चौपाई ॥

सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै। आलस पाप अविद्या नासै॥

॥ चौपाई ॥

सृष्टि बीज जग जननि भवानी। कालरात्रि वरदा कल्याणी॥

॥ चौपाई ॥

ब्रह्मा विष्णु रुद्र सुर जेते। तुम सों पावें सुरता तेते॥

॥ चौपाई ॥

तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे। जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे॥

॥ चौपाई ॥

महिमा अपरम्पार तुम्हारी। जय जय जय त्रिपदा भयहारी॥

॥ चौपाई ॥

पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना। तुम सम अधिक न जग में आना॥

॥ चौपाई ॥

तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा। तुमहिं पाय कछु रहै न कलेशा॥

॥ चौपाई ॥

जानत तुमहिं तुमहिं ह्वै जाई। पारस परसि कुधातु सुहाई॥

॥ चौपाई ॥

तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई। माता तुम सब ठौर समाई॥

॥ चौपाई ॥

ग्रह नक्षत्र ब्रह्माण्ड घनेरे। सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे॥

॥ चौपाई ॥

सकल सृष्टि की प्राण विधाता। पालक पोषक नाशक त्राता॥

॥ चौपाई ॥

मातेश्वरी दया व्रत धारी। तुम सन तरे पातकी भारी॥

॥ चौपाई ॥

जापर कृपा तुम्हारी होई। तापर कृपा करें सब कोई॥

॥ चौपाई ॥

मंद बुद्धि ते बुधि बल पावें। रोगी रोग रहित हो जावें॥

॥ चौपाई ॥

दरिद्र मिटै कटै सब पीरा। नाशै दुःख हरै भव भीरा॥

॥ चौपाई ॥

गृह क्लेश चित चिन्ता भारी। नासै गायत्री भय हारी॥

॥ चौपाई ॥

सन्तति हीन सुसन्तति पावें। सुख संपति युत मोद मनावें॥

॥ चौपाई ॥

भूत पिशाच सबै भय खावें। यम के दूत निकट नहिं आवें॥

॥ चौपाई ॥

जो सधवा सुमिरें चित लाई। अछत सुहाग सदा सुखदाई॥

॥ चौपाई ॥

घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी। विधवा रहें सत्य व्रत धारी॥

॥ चौपाई ॥

जयति जयति जगदम्ब भवानी। तुम सम और दयालु न दानी॥

॥ चौपाई ॥

जो सतगुरु सों दीक्षा पावे। सो साधन को सफल बनावे॥

॥ चौपाई ॥

सुमिरन करे सुरुचि बड़भागी। लहै मनोरथ गृही विरागी॥

॥ चौपाई ॥

अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता। सब समर्थ गायत्री माता॥

॥ चौपाई ॥

ऋषि मुनि यती तपस्वी योगी। आरत अर्थी चिन्तित भोगी॥

॥ चौपाई ॥

जो जो शरण तुम्हारी आवें। सो सो मन वांछित फल पावें॥

॥ चौपाई ॥

बल बुधि विद्या शील स्वभाउ। धन वैभव यश तेज उछाउ॥

॥ चौपाई ॥

सकल बढ़ें उपजें सुख नाना। जे यह पाठ करै धरि ध्याना॥

॥ दोहा ॥

यह चालीसा भक्ति युत, पाठ करै जो कोय। तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गायत्री चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है। परंपरा से सुबह सूर्योदय के समय या संध्या के समय, स्नान के बाद पाठ करना अच्छा माना जाता है। गायत्री जयंती और नवरात्रि में इसका विशेष पाठ होता है।

गायत्री चालीसा और गायत्री मंत्र में क्या अंतर है?

गायत्री मंत्र ऋग्वेद का संस्कृत मंत्र है जिसका जप माला पर किया जाता है। गायत्री चालीसा हिंदी में लिखी गई स्तुति है जो उसी देवी की महिमा गाती है। बहुत से भक्त पहले मंत्र जप और फिर चालीसा पाठ करते हैं।

गायत्री चालीसा पढ़ने का क्या महत्व है?

परंपरा में गायत्री को ज्ञान और सद्बुद्धि की देवी माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इसके नियमित पाठ से मन शांत होता है, बुद्धि निर्मल होती है और अच्छे विचार आते हैं।

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