बृहस्पति देव चालीसा — अर्थ सहित
बृहस्पति देवताओं के गुरु और नवग्रहों में गुरु ग्रह हैं। गुरुवार को उनका व्रत रखने और इस चालीसा का पाठ करने से विद्या, बुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
॥ दोहा ॥
जय बृहस्पति देव प्रभु, देवन के गुरु ज्ञान। गुरु ग्रह के अधिपति, करहु कृपा भगवान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय बृहस्पति भगवाना। देव गुरु करहु कल्याना॥ पीत वर्ण तन सुंदर धारी। चतुर्भुज रूप मनोहारी॥
॥ चौपाई ॥
गज वाहन पर आसन सोहे। दर्शन करि सब मन मोहे॥ हाथ में पुस्तक दंड विराजे। ज्ञान ज्योति चहुँ दिस में छाजे॥
॥ चौपाई ॥
पीत रंग फल फूल चढ़ावें। गुरुवार पूजा मन को भावें॥ चने की दाल और केला। चढ़े प्रसाद सभी को प्याला॥
॥ चौपाई ॥
व्याकरण वेद के ज्ञाता। देवन के परम गुरु दाता॥ अंगिरस ऋषि के पुत्र महाना। त्रिलोक में फैला है नाम-ठाना॥
॥ चौपाई ॥
इंद्र को शासन दिया गुरु ने। देवन की नित रक्षा किए ने॥ दैत्यन को जब संकट आया। देवगुरु ने पथ दिखलाया॥
॥ चौपाई ॥
गुरु ग्रह बृहस्पति महाराजा। नवग्रहन में सबसे राजा॥ कुंडली में गुरु जब बलवाना। घर में होवे सुख-कल्याना॥
॥ चौपाई ॥
धनु मीन के अधिपति स्वामी। शुभ ग्रह हैं अंतर्यामी॥ कर्क राशि में उच्च विराजे। मकर में नीच होय अधूरा छाजे॥
॥ चौपाई ॥
विद्या बुद्धि ज्ञान के दाता। संतान और सुख के विधाता॥ गुरुवार को जो व्रत धारे। बृहस्पति देव सब दुख टारे॥
॥ चौपाई ॥
पीला वस्त्र पहनकर पूजा। मन में उनकी छवि ली भूजा॥ चने की दाल दान जो करे। गुरु की कृपा उस पर बरसे॥
॥ चौपाई ॥
केला और पीला फूल चढ़ावें। गुड़ और चना भोग लगावें॥ दीपक जलाकर आरती गावें। बृहस्पति देव मन को भावें॥
॥ चौपाई ॥
शिक्षा में जो बाधा आवे। गुरुवार व्रत से दूर भगावे॥ व्यापार में जो रुकावट होय। गुरु कृपा से सब दूर होय॥
॥ चौपाई ॥
संतान हीन जो नर-नारी। गुरु भजन से हो सुखकारी॥ गुरु ग्रह शुभ जब होय कुंडली। संतान सुख मिले हो भरपूरी॥
॥ चौपाई ॥
गुरु की महिमा अपार बखानी। वेद पुराण में सब ने जानी॥ देव दानव ऋषि मुनि सारे। गुरु के चरणन बारम्बारे॥
॥ चौपाई ॥
बृहस्पति की जय जय बोलो। हृदय कपाट खोलो खोलो॥ श्रद्धा भक्ति से पूजा करो। जीवन को सुखमय भर दो॥
॥ चौपाई ॥
देश भक्ति में बृहस्पति साथी। धर्म की रक्षा में अग्र पाती॥ न्याय और सत्य के ये आधार। गुरु करें जग का उद्धार॥
॥ चौपाई ॥
जो भी पाठ करे मन लाकर। गुरुवार उठे सवेरे जागर॥ पीला धागा बाँधे हाथ में। गुरु की रहें कृपा साथ में॥
॥ चौपाई ॥
गुरु ग्रह पीड़ा जो जग में पाए। गुरुवार व्रत से दूर भगाए॥ कुंडली में गुरु जब निर्बल होय। भक्ति से उसे बलशाली होय॥
॥ चौपाई ॥
ऋषि अंगिरस के घर जन्मे। ब्रह्मा जी के मानस वर्णे॥ देवताओं के प्रिय गुरुदेव। त्रिकाल ज्ञाता अतुल महादेव॥
॥ चौपाई ॥
जप तप और दान से पाएं। गुरु कृपा को मन में ध्याएं॥ चालीसा नित पाठ जो करे। बृहस्पति देव सब मनोरथ भरे॥
॥ चौपाई ॥
विद्यार्थी करें जो पाठ। बुद्धि होय तीव्र और साठ॥ परीक्षा में सफलता पाएं। गुरु के चरण में शीश नवाएं॥
॥ चौपाई ॥
व्यापारी जो पढ़े चालीसा। रोज़गार में हो नहीं कमी-सा॥ घर में लक्ष्मी वास करावें। बृहस्पति देव सुख धन लावें॥
॥ चौपाई ॥
गृहस्थ जीवन सुखी बनाएं। दांपत्य में प्रेम बढ़ाएं॥ संतान को दें ज्ञान सुशीला। गुरु की लीला अति रंगीला॥
॥ चौपाई ॥
गुरु ग्रह से जो होय पीड़ित। चालीसा पाठ से होय मुक्त॥ साढ़े साती में भी राहत। गुरु दें मन को शांति आहत॥
॥ चौपाई ॥
गुरुवार का व्रत जो रखे। पीला पहन, पूजा-आरती थखे॥ केले का प्रसाद लगाए। बृहस्पति देव मन को भाए॥
॥ चौपाई ॥
गुरु दोष से मुक्ति चाहो। शुद्ध मन से शरण में आओ॥ दशा-अंतर्दशा में राहत। गुरु करें जग-जीवन आबाद॥
॥ चौपाई ॥
नमन करूं मैं बार-बार। गुरुदेव करो बेड़ा पार॥ शरण में तेरी आया सेवक। कृपा की दृष्टि डालो देवक॥
॥ चौपाई ॥
जो भी इस चालीसा को गावे। बृहस्पति देव की कृपा पावे॥ घर में होय सुख-समृद्धि। जीवन में बढ़े जय और वृद्धि॥
॥ दोहा ॥
बृहस्पति देव की जय जय, गुरु ग्रह के स्वामी। कृपा करो हम दासों पर, अंतर्यामी॥
अर्थ
दोहा
जय बृहस्पति देव प्रभु, देवन के गुरु ज्ञान। गुरु ग्रह के अधिपति, करहु कृपा भगवान॥
हे बृहस्पति देव, आपकी जय हो। आप देवताओं के गुरु और ज्ञान के स्वामी हैं। गुरु ग्रह के अधिपति, कृपा करें।
चौपाई 1
जय जय जय बृहस्पति भगवाना। देव गुरु करहु कल्याना॥ पीत वर्ण तन सुंदर धारी। चतुर्भुज रूप मनोहारी॥
हे बृहस्पति भगवान, जय जय जय हो। देवगुरु, कल्याण कीजिए। पीत (पीले) वर्ण का सुंदर शरीर धारण करने वाले, चार भुजाओं वाले मनोहर रूप।
चौपाई 2
गज वाहन पर आसन सोहे। दर्शन करि सब मन मोहे॥ हाथ में पुस्तक दंड विराजे। ज्ञान ज्योति चहुँ दिस में छाजे॥
हाथी पर आसन शोभित है। उनके दर्शन से सभी का मन मोहित हो जाता है। हाथ में पुस्तक और दंड विराजमान है, चारों दिशाओं में ज्ञान की ज्योति फैल रही है।
चौपाई 3
पीत रंग फल फूल चढ़ावें। गुरुवार पूजा मन को भावें॥ चने की दाल और केला। चढ़े प्रसाद सभी को प्याला॥
पीले फल-फूल चढ़ाएं, गुरुवार की पूजा मन को अच्छी लगती है। चने की दाल और केला, यह प्रसाद सभी को दिया जाता है।
चौपाई 4
व्याकरण वेद के ज्ञाता। देवन के परम गुरु दाता॥ अंगिरस ऋषि के पुत्र महाना। त्रिलोक में फैला है नाम-ठाना॥
वे व्याकरण और वेद के ज्ञाता हैं, देवताओं को ज्ञान देने वाले परम गुरु हैं। महर्षि अंगिरस के महान पुत्र, उनका नाम और यश तीनों लोकों में फैला हुआ है।
चौपाई 5
इंद्र को शासन दिया गुरु ने। देवन की नित रक्षा किए ने॥ दैत्यन को जब संकट आया। देवगुरु ने पथ दिखलाया॥
गुरु ने इंद्र को शासन-ज्ञान दिया, देवताओं की सदा रक्षा की। जब देवताओं पर संकट आया, देवगुरु ने ही उन्हें रास्ता दिखाया।
चौपाई 6
गुरु ग्रह बृहस्पति महाराजा। नवग्रहन में सबसे राजा॥ कुंडली में गुरु जब बलवाना। घर में होवे सुख-कल्याना॥
बृहस्पति महाराज गुरु ग्रह के स्वामी हैं और नवग्रहों में सबसे श्रेष्ठ हैं। कुंडली में गुरु जब बलवान हो तो घर में सुख और कल्याण होता है।
चौपाई 7
धनु मीन के अधिपति स्वामी। शुभ ग्रह हैं अंतर्यामी॥ कर्क राशि में उच्च विराजे। मकर में नीच होय अधूरा छाजे॥
धनु और मीन राशि के स्वामी हैं, अंतर्यामी शुभ ग्रह हैं। कर्क राशि में उच्च होते हैं और मकर में नीच — ऐसा परंपरागत ज्योतिष शास्त्र बताता है।
चौपाई 8
विद्या बुद्धि ज्ञान के दाता। संतान और सुख के विधाता॥ गुरुवार को जो व्रत धारे। बृहस्पति देव सब दुख टारे॥
वे विद्या, बुद्धि और ज्ञान देने वाले हैं, संतान और सुख के विधाता हैं। जो गुरुवार को व्रत रखता है, बृहस्पति देव उसके सभी दुख हर लेते हैं।
चौपाई 9
पीला वस्त्र पहनकर पूजा। मन में उनकी छवि ली भूजा॥ चने की दाल दान जो करे। गुरु की कृपा उस पर बरसे॥
पीला वस्त्र पहनकर पूजा करें और मन में उनकी छवि धारण करें। जो चने की दाल दान करता है, गुरु की कृपा उस पर बरसती है।
चौपाई 10
केला और पीला फूल चढ़ावें। गुड़ और चना भोग लगावें॥ दीपक जलाकर आरती गावें। बृहस्पति देव मन को भावें॥
केला और पीला फूल चढ़ाएं, गुड़-चना का भोग लगाएं, दीपक जलाकर आरती गाएं — बृहस्पति देव मन को प्रसन्न करते हैं।
चौपाई 11
शिक्षा में जो बाधा आवे। गुरुवार व्रत से दूर भगावे॥ व्यापार में जो रुकावट होय। गुरु कृपा से सब दूर होय॥
पढ़ाई में जो बाधा आए, गुरुवार व्रत से दूर हो जाती है। व्यापार में जो रुकावट हो, गुरु की कृपा से सब दूर हो जाता है।
चौपाई 12
संतान हीन जो नर-नारी। गुरु भजन से हो सुखकारी॥ गुरु ग्रह शुभ जब होय कुंडली। संतान सुख मिले हो भरपूरी॥
जो पुरुष या स्त्री संतान-हीन हैं, गुरु की भक्ति से उन्हें सुख मिलता है। कुंडली में गुरु ग्रह शुभ हो तो संतान का सुख भरपूर मिलता है।
चौपाई 13
गुरु की महिमा अपार बखानी। वेद पुराण में सब ने जानी॥ देव दानव ऋषि मुनि सारे। गुरु के चरणन बारम्बारे॥
गुरु की महिमा अपार है, जो वेद और पुराणों में सभी ने जानी है। देव, दानव, ऋषि और मुनि — सभी बार-बार गुरु के चरणों में झुकते हैं।
चौपाई 14
बृहस्पति की जय जय बोलो। हृदय कपाट खोलो खोलो॥ श्रद्धा भक्ति से पूजा करो। जीवन को सुखमय भर दो॥
बृहस्पति की जय जय बोलो, हृदय के कपाट खोलो। श्रद्धा और भक्ति से पूजा करो, जीवन को सुखमय बना दो।
चौपाई 15
देश भक्ति में बृहस्पति साथी। धर्म की रक्षा में अग्र पाती॥ न्याय और सत्य के ये आधार। गुरु करें जग का उद्धार॥
देश-भक्ति में बृहस्पति साथी हैं, धर्म की रक्षा में अग्रणी हैं। न्याय और सत्य के ये आधार हैं, गुरु जगत का उद्धार करते हैं।
चौपाई 16
जो भी पाठ करे मन लाकर। गुरुवार उठे सवेरे जागर॥ पीला धागा बाँधे हाथ में। गुरु की रहें कृपा साथ में॥
जो भी मन लगाकर पाठ करे, गुरुवार को सवेरे उठे, हाथ में पीला धागा बाँधे — गुरु की कृपा उसके साथ रहती है।
चौपाई 17
गुरु ग्रह पीड़ा जो जग में पाए। गुरुवार व्रत से दूर भगाए॥ कुंडली में गुरु जब निर्बल होय। भक्ति से उसे बलशाली होय॥
जो जगत में गुरु ग्रह की पीड़ा भोग रहा है, गुरुवार के व्रत से वह दूर होती है। कुंडली में गुरु कमज़ोर हो तो भक्ति से वह बलशाली होता है।
चौपाई 18
ऋषि अंगिरस के घर जन्मे। ब्रह्मा जी के मानस वर्णे॥ देवताओं के प्रिय गुरुदेव। त्रिकाल ज्ञाता अतुल महादेव॥
ऋषि अंगिरस के घर जन्मे, ब्रह्मा जी के मानस में वर्णित हैं। देवताओं के प्रिय गुरुदेव, तीनों कालों के ज्ञाता अतुल महाशक्ति।
चौपाई 19
जप तप और दान से पाएं। गुरु कृपा को मन में ध्याएं॥ चालीसा नित पाठ जो करे। बृहस्पति देव सब मनोरथ भरे॥
जप, तप और दान से गुरु की कृपा पाएं, मन में उनका ध्यान करें। जो नित्य इस चालीसा का पाठ करे, बृहस्पति देव उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
चौपाई 20
विद्यार्थी करें जो पाठ। बुद्धि होय तीव्र और साठ॥ परीक्षा में सफलता पाएं। गुरु के चरण में शीश नवाएं॥
जो विद्यार्थी इस चालीसा का पाठ करे, उसकी बुद्धि तीव्र होती है और सहायता मिलती है। परीक्षा में सफलता मिलती है, गुरु के चरणों में शीश नवाएं।
चौपाई 21
व्यापारी जो पढ़े चालीसा। रोज़गार में हो नहीं कमी-सा॥ घर में लक्ष्मी वास करावें। बृहस्पति देव सुख धन लावें॥
जो व्यापारी इस चालीसा का पाठ करे, उसके रोज़गार में कमी नहीं होती। घर में लक्ष्मी का वास होता है और बृहस्पति देव सुख और धन लाते हैं।
चौपाई 22
गृहस्थ जीवन सुखी बनाएं। दांपत्य में प्रेम बढ़ाएं॥ संतान को दें ज्ञान सुशीला। गुरु की लीला अति रंगीला॥
गृहस्थ जीवन को सुखी बनाएं, दांपत्य में प्रेम बढ़ाएं। संतान को ज्ञान और सुशीलता दें — गुरु की लीला अत्यंत अद्भुत है।
चौपाई 23
गुरु ग्रह से जो होय पीड़ित। चालीसा पाठ से होय मुक्त॥ साढ़े साती में भी राहत। गुरु दें मन को शांति आहत॥
जो गुरु ग्रह से पीड़ित हो, चालीसा के पाठ से मुक्ति मिलती है। साढ़े साती में भी राहत मिलती है, गुरु मन को शांति देते हैं।
चौपाई 24
गुरुवार का व्रत जो रखे। पीला पहन, पूजा-आरती थखे॥ केले का प्रसाद लगाए। बृहस्पति देव मन को भाए॥
जो गुरुवार का व्रत रखे, पीले वस्त्र पहनकर पूजा-आरती करे, केले का प्रसाद लगाए — बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं।
चौपाई 25
गुरु दोष से मुक्ति चाहो। शुद्ध मन से शरण में आओ॥ दशा-अंतर्दशा में राहत। गुरु करें जग-जीवन आबाद॥
गुरु दोष से मुक्ति चाहते हो तो शुद्ध मन से शरण में आओ। गुरु की दशा-अंतर्दशा में राहत मिलती है, गुरु जगत-जीवन को समृद्ध करते हैं।
चौपाई 26
नमन करूं मैं बार-बार। गुरुदेव करो बेड़ा पार॥ शरण में तेरी आया सेवक। कृपा की दृष्टि डालो देवक॥
बार-बार नमन करता हूँ, हे गुरुदेव, मेरी नाव पार लगाओ। आपकी शरण में सेवक आया है, कृपा की दृष्टि डालिए।
चौपाई 27
जो भी इस चालीसा को गावे। बृहस्पति देव की कृपा पावे॥ घर में होय सुख-समृद्धि। जीवन में बढ़े जय और वृद्धि॥
जो भी इस चालीसा को गाए, बृहस्पति देव की कृपा पाए। घर में सुख-समृद्धि हो, जीवन में जय और वृद्धि हो।
दोहा
बृहस्पति देव की जय जय, गुरु ग्रह के स्वामी। कृपा करो हम दासों पर, अंतर्यामी॥
हे बृहस्पति देव, जय जय हो। गुरु ग्रह के स्वामी, अंतर्यामी — हम दासों पर कृपा करें।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बृहस्पति देव का व्रत कैसे करें?
गुरुवार को सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनें, बृहस्पति देव को केला, पीले फूल और चने की दाल चढ़ाएं, चालीसा पढ़ें और शाम को केले का प्रसाद लें।
गुरुवार को क्या दान करें?
गुरुवार को चने की दाल, पीले वस्त्र, केला, हल्दी और सोना दान करना शुभ माना जाता है।
बृहस्पति ग्रह कमज़ोर हो तो क्या करें?
गुरुवार का व्रत रखें, पीला वस्त्र पहनें, चने की दाल दान करें, बृहस्पति चालीसा पढ़ें और पुखराज (पीला नीलम) धारण करने पर विचार करें — ये परंपरागत उपाय हैं।