ॐ जय श्री श्याम हरे आरती — अर्थ सहित

खाटू श्याम जी को भीम के पोते बर्बरीक का रूप माना जाता है, जिन्होंने श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। राजस्थान के खाटू धाम में उनका प्रसिद्ध मंदिर है। यह आरती उनके श्रृंगार, भोग और सेवा का सुंदर वर्णन करती है। ग्यारस (एकादशी) और फाल्गुन मेले में यह विशेष रूप से गाई जाती है।

6 पद · लगभग 4 मिनट

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे। तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥

गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे। खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥

मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे। सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥

झांझ कटोरा और घड़ियावल, शंख मृदंग घुरे। भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे। सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाटू श्याम जी कौन हैं?

परंपरा के अनुसार वे महाभारत के वीर बर्बरीक हैं, घटोत्कच के पुत्र। श्रीकृष्ण ने उनके शीश-दान से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम 'श्याम' दिया।

खाटू श्याम की आरती कब गाएँ?

रोज़ सुबह-शाम की पूजा में, और खासकर हर महीने की शुक्ल एकादशी (ग्यारस) और फाल्गुन मेले में।

खाटू श्याम जी को क्या भोग लगाते हैं?

आरती में ही बताया गया है — लड्डू, खीर और चूरमा। कई भक्त कच्चा दूध और मिश्री भी चढ़ाते हैं।

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