खाटू श्याम चालीसा — अर्थ सहित

खाटू श्याम जी (बर्बरीक) महाभारत काल में भीम के पोते थे, जिन्होंने भगवान श्री कृष्ण को अपना शीश अर्पित किया। कलयुग में वे 'हारे का सहारा' के रूप में पूजे जाते हैं। राजस्थान के खाटू धाम में उनका प्रसिद्ध मंदिर है।

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॥ दोहा ॥

जय खाटू नरेश मेरे, शीश धरूं पग धूल। कीजे मेरी विनती, करना मत मुझ भूल॥

॥ दोहा ॥

भीम पौत्र बर्बरीका, कृष्ण को दिया शीश दान। खाटू धाम में विराजे, करें भक्तों का कल्याण॥

॥ चौपाई ॥

जय जय श्री खाटू नरेशा। हारन के हो परम आदेशा॥ हारे का तू ही है सहारा। श्याम भक्त जन का रखवारा॥

॥ चौपाई ॥

श्याम नाम है अति प्यारा। जग में फैला यश हमारा॥ कृष्ण नाम भी श्याम कहावे। भक्तन के मन में सुख पावे॥

॥ चौपाई ॥

राजस्थान में खाटू ग्रामा। दर्शन को आवे नर-नारी। देश विदेश से आएँ भक्त। श्याम शरण में हो जाएँ मुक्त॥

॥ चौपाई ॥

फाल्गुन मेले में आती भीड़। लाखों श्रद्धालु, भक्त की पीड़॥ शीश दान की कथा सुनाएं। श्याम चरित्र मन में ध्याएं॥

॥ चौपाई ॥

बर्बरीक था वीर सयाना। माँ भीमी को था मनपसंद रखाना॥ तीन बाण से जीते सबको। न था ताकत किसी की उनको॥

॥ चौपाई ॥

युद्ध देखने की थी चाहत। कृष्ण ने पूछी उनकी राहत॥ दोनों पक्षों में कौन है कमज़ोर। उसका साथ दूंगा, कहा जोर॥

॥ चौपाई ॥

कृष्ण जानते थे यह बात। दान माँगा, शीश की सौगात॥ बर्बरीक ने दिया वचन पूरा। शीश दिया अपना पूरा-पूरा॥

॥ चौपाई ॥

कृष्ण ने दिया अमर वरदाना। कलियुग में पूजे जाने का माना॥ श्याम नाम से होगी पूजा। भक्तों की पीड़ा होगी दूजा॥

॥ चौपाई ॥

युद्ध देखा तीनों लोका। देवताओं ने किया शोका॥ शीश ऊंचे पर्वत पर रखाई। श्याम दृष्टि से सब कुछ देखाई॥

॥ चौपाई ॥

लाखेरा ग्रामपति थे दर्शनी। स्वप्न में आए खाटू के वासी॥ मंदिर बनाने का दिया आदेश। खाटू में स्थापित हुआ महेश॥

॥ चौपाई ॥

श्याम कुंड में स्नान करावें। भक्त सभी मनवांछित पावें॥ रूप सुहाना श्याम का देखो। मन में उनकी छवि को रेखो॥

॥ चौपाई ॥

लाल कपड़ा, मोर मुकुट सोहे। दर्शन करि सब मन को मोहे॥ हाथ में ध्वजा लिए खड़े हैं। भक्तों के संकट सब हरे हैं॥

॥ चौपाई ॥

श्याम की जय बोलो भाई। देखो कैसी महिमा बड़ाई॥ हारे को सहारा देते। टूटे दिल को फिर से जोते॥

॥ चौपाई ॥

गरीब की सुनते फ़रियाद। देते हैं जीवन में आबाद॥ धनवान का भी करते भला। श्याम चरण में सब मिले मेला॥

॥ चौपाई ॥

व्यापारी जो आए शरण में। लाभ मिले उसके जीवन में॥ रोगी को भी देते आरोग्य। श्याम भक्ति बड़ी उपयोग्य॥

॥ चौपाई ॥

संतान सुख देते श्याम। पूर्ण करते सब काम॥ विवाह में आए जो अड़चन। श्याम हटाएं सब बाधन॥

॥ चौपाई ॥

नौकरी में बाधा जो आए। श्याम ध्यान से दूर हो जाए॥ मन में रखो श्याम की भक्ति। जीवन में आएगी नई शक्ति॥

॥ चौपाई ॥

प्रेम से जो पुकारे श्याम। दौड़े आए पूरा करें काम॥ दास की सुनते हैं पुकार। कृपा की धारा चले अपार॥

॥ चौपाई ॥

फाल्गुन शुक्ल एकादशी। श्याम जन्मोत्सव मनाएं ऋषि॥ दर्शन का यह पुण्य काल। श्याम भक्तों का हो कल्याण॥

॥ चौपाई ॥

श्याम नाम जपो हर दिन। कट जाएंगे सब दुख-दीन॥ सुबह शाम श्याम-श्याम कहो। मन में उनकी छवि को रहो॥

॥ चौपाई ॥

श्याम भक्त जो चालीसा गावे। श्याम कृपा को नित पावे॥ घर में होगी सुख-समृद्धि। श्याम चरण में पाएं सिद्धि॥

॥ दोहा ॥

श्याम दरबार में आया, लेकर मन की आस। करो पूर्ण मनोरथ, हे हारों के खास॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाटू श्याम कौन हैं?

खाटू श्याम महाभारत के वीर बर्बरीक हैं जो भीम के पोते और हिडिम्बा के पुत्र थे। भगवान कृष्ण के वरदान से कलियुग में वे 'श्याम' नाम से पूजे जाते हैं।

खाटू मेला कब लगता है?

फाल्गुन शुक्ल दशमी से द्वादशी तक (फरवरी-मार्च) खाटू में विशाल मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं।

खाटू श्याम चालीसा का पाठ कब करें?

खाटू श्याम चालीसा का पाठ किसी भी समय, विशेषकर गुरुवार और शनिवार को करना शुभ माना जाता है।

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