ॐ जय गंगे माता आरती — अर्थ सहित
'ॐ जय गंगे माता' पवित्र नदी माँ गंगा की आरती है। इसमें उनके निर्मल जल, राजा सगर के पुत्रों के उद्धार और उनकी शरण में आने वालों की मुक्ति का वर्णन है। गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान के बाद और घर की पूजा में यह आरती गाई जाती है।
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
चंद्र सी ज्योत तुम्हारी, जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता। यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता। दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
अर्थ
पद 1
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
हे माँ गंगा, आपकी जय हो। जो आपका ध्यान करता है, उसे मनचाहा फल मिलता है।
पद 2
चंद्र सी ज्योत तुम्हारी, जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥
आपकी चमक चंद्रमा जैसी है और आपका जल निर्मल बहता है। जो आपकी शरण में आता है, वह भवसागर से पार हो जाता है।
पद 3
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
आपने राजा सगर के पुत्रों का उद्धार किया, यह सारा संसार जानता है। आपकी कृपा दृष्टि तीनों लोकों को सुख देती है।
पद 4
एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता। यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥
जो एक बार भी सच्चे मन से आपकी शरण में आ जाता है, उसका यम का डर मिट जाता है और वह परम गति पाता है।
पद 5
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता। दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
हे माता, जो व्यक्ति रोज़ आपकी आरती गाता है, वह सेवक सहज ही मुक्ति पा लेता है।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गंगा आरती कब गाई जाती है?
हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी के घाटों पर रोज़ शाम को, और घर में गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति या गंगा स्नान के बाद।
आरती में राजा सगर के पुत्रों का ज़िक्र क्यों है?
कथा के अनुसार कपिल मुनि के श्राप से सगर के साठ हज़ार पुत्र भस्म हो गए थे। उनके वंशज भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आईं और उनके जल से उन पुत्रों का उद्धार हुआ।
क्या घर पर गंगा आरती कर सकते हैं?
हाँ। गंगाजल के पात्र या माँ गंगा के चित्र के सामने दीपक जलाकर यह आरती घर पर भी श्रद्धा से गाई जाती है।