जय भैरव देवा आरती — अर्थ सहित
भैरव जी भगवान शिव का उग्र रूप माने जाते हैं और काशी के कोतवाल कहलाते हैं। इस आरती में उनके बटुक (बालक) रूप का भी वर्णन है, जो पैरों में घुंघरू बाँधे और डमरू बजाते हुए भक्तों का मन प्रसन्न करते हैं। रविवार, मंगलवार और भैरव अष्टमी पर यह आरती गाई जाती है।
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा। जय काली और गौरा देवी कृत सेवा॥
तुम्हीं पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक। भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक॥
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी। महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी॥
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे। चौमुख दीपक दर्शन दुःख सगरे खोवे॥
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी। कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी॥
पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू डमकावत। बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत॥
बटुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे। कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावे॥
अर्थ
पद 1
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा। जय काली और गौरा देवी कृत सेवा॥
हे भैरव देव, आपकी जय हो। माँ काली और गौरा देवी भी आपकी सेवा करती हैं।
पद 2
तुम्हीं पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक। भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक॥
आप ही पापों से उबारने वाले और दुख के सागर से पार लगाने वाले हैं। आप भयानक रूप धारण करते हैं, पर भक्तों को सुख देते हैं।
पद 3
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी। महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी॥
कुत्ता आपका वाहन है और हाथ में त्रिशूल है। आपकी महिमा अपार है; हे भय हरने वाले, आपकी जय हो।
पद 4
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे। चौमुख दीपक दर्शन दुःख सगरे खोवे॥
हे देव, आपके बिना कोई पूजा सफल नहीं होती। चार मुख वाले दीपक के साथ आपके दर्शन से सारे दुख मिटते हैं, ऐसा भक्त मानते हैं।
पद 5
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी। कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी॥
तेल और दही मिले पकवानों का भोग आपको चढ़ाया जाता है। हे भैरव, कृपा कीजिए और देर मत कीजिए।
पद 6
पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू डमकावत। बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत॥
पैरों में घुंघरू बजते हैं और आप डमरू बजाते हैं। बटुकनाथ बालक बनकर आप भक्तों का मन प्रसन्न करते हैं।
पद 7
बटुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे। कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावे॥
धरणीधर कहते हैं कि जो कोई बटुकनाथ की यह आरती गाता है, वह मनचाहा फल पाता है।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भैरव जी की आरती कब करनी चाहिए?
परंपरा में रविवार और मंगलवार, हर महीने की कालाष्टमी और विशेष रूप से मार्गशीर्ष की भैरव अष्टमी पर।
भैरव जी का वाहन क्या है?
भैरव जी का वाहन कुत्ता (श्वान) है। इसीलिए कई भक्त भैरव पूजा के दिन कुत्तों को रोटी खिलाते हैं।
बटुक भैरव कौन हैं?
बटुक भैरव भैरव जी का सौम्य बाल रूप हैं। यह आरती उन्हीं को 'बटुकनाथ' कहकर समर्पित है।