श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ — अर्थ सहित

बांके बिहारी जी वृंदावन में विराजमान श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध रूप हैं, जिन्हें संत स्वामी हरिदास जी ने प्रकट किया माना जाता है। 'बांके' यानी तीन जगह से मुड़े हुए, त्रिभंगी मुद्रा में खड़े कृष्ण। यह सरल, मीठी आरती उनके मोर मुकुट, बांसुरी और चरणों की महिमा गाती है।

6 पद · लगभग 3 मिनट

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ। हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ। आरती गाऊँ प्यारे आपको रिझाऊँ। श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे। प्यारी बंसी मेरो मन मोहे। देख छवि बलिहारी मैं जाऊँ॥

चरणों से निकली गंगा प्यारी। जिसने सारी दुनिया तारी। मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ॥

दास अनाथ के नाथ आप हो। दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो। हरि चरणों में शीश झुकाऊँ॥

श्री हरिदास के प्यारे तुम हो। मेरे मोहन जीवन प्यारे तुम हो। देख युगल छवि बलि बलि जाऊँ॥

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ। हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांके बिहारी जी का मंदिर कहाँ है?

उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में वृंदावन में। यह ब्रज के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

स्वामी हरिदास कौन थे?

स्वामी हरिदास 16वीं सदी के संत और संगीतज्ञ थे। मान्यता है कि उनकी भक्ति से बांके बिहारी जी निधिवन में प्रकट हुए।

'बांके' का अर्थ क्या है?

'बांके' यानी टेढ़े या तीन जगह से मुड़े हुए। यह कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा को बताता है, जिसमें वे बांसुरी बजाते खड़े हैं।

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