कबीर के 20 प्रसिद्ध दोहे — अर्थ सहित

संत कबीरदास (लगभग 1440–1518) निर्गुण भक्ति के महान कवि थे। उनके दोहे हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी के लिए समान रूप से पूज्य हैं। ये दोहे सदियों से पाठ्यक्रम, कहावतों और जनजीवन में रचे-बसे हैं।

20 दोहे · लगभग 15 मिनट

॥ दोहा ॥

बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोय॥

॥ दोहा ॥

साईं इतना दीजिए जा में कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूं साधु न भूखा जाय॥

॥ दोहा ॥

काल करे सो आज कर आज करे सो अब। पल में परलय होएगी बहुरि करेगा कब॥

॥ दोहा ॥

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय॥

॥ दोहा ॥

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम के पढ़े सो पंडित होय॥

॥ दोहा ॥

ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय॥

॥ दोहा ॥

निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय॥

॥ दोहा ॥

माला फेरत जुग गया फिरा न मन का फेर। कर का मनका डारि दे मन का मनका फेर॥

॥ दोहा ॥

तिनका कबहूं ना निन्दिए जो पाँव तले होय। कबहूं उड़ि आँखिन परे पीर घनेरी होय॥

॥ दोहा ॥

माटी कहे कुम्हार को तू क्या रौंदे मोय। एक दिन ऐसा आएगा मैं रौंदूंगी तोय॥

॥ दोहा ॥

जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिए ज्ञान। मोल करो तलवार का पड़ी रहन दो म्यान॥

॥ दोहा ॥

बड़ा भया तो क्या भया जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर॥

॥ दोहा ॥

धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए फल होय॥

॥ दोहा ॥

कबीर सोता क्या करे जागो जपो मुरार। एक दिन सोना होगा लंबे पाँव पसार॥

॥ दोहा ॥

चाह मिटी चिंता मिटी मनवा बेपरवाह। जिसको कुछ नहीं चाहिए वह शाहन का शाह॥

॥ दोहा ॥

जो तोको काँटा बुवै ताहि बोय तू फूल। तोहि फूल को फूल है वाहि है तिरसूल॥

॥ दोहा ॥

करता था तो क्यों किया अब करि क्यों पछिताय। बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय॥

॥ दोहा ॥

जब गुण को गाहक मिले तब गुण लाख बिकाय। जब गुण को गाहक नहीं तब कौड़ी बदले जाय॥

॥ दोहा ॥

मन के हारे हार है मन के जीते जीत। पारब्रह्म को पाइए मन ही की परतीत॥

॥ दोहा ॥

कबीर तन पंछी भया जहाँ मन तहाँ उड़ि जाय। जो जैसी संगति कर परे सो तैसा फल पाय॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कबीर के दोहे किस भाषा में हैं?

कबीर के दोहे 'सधुक्कड़ी' या 'खड़ीबोली' में हैं — एक ऐसी मिश्रित भाषा जिसमें हिंदी, अवधी, ब्रज, राजस्थानी और पंजाबी के शब्द मिलते हैं। इसे 'पंचमेल खिचड़ी' भी कहते हैं।

कबीर के सबसे प्रसिद्ध दोहे कौन से हैं?

'बुरा जो देखन मैं चला...', 'गुरु गोविन्द दोऊ खड़े...', 'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ...', 'काल करे सो आज कर...' और 'साईं इतना दीजिए...' — ये सर्वाधिक पढ़े और उद्धृत किए जाने वाले दोहे हैं।

कबीरदास का जन्म कब हुआ था?

कबीरदास का जन्म लगभग 1440 ई. में काशी (वाराणसी) में हुआ और उनकी मृत्यु लगभग 1518 ई. में मगहर में हुई। वे निर्गुण भक्ति धारा के सबसे प्रमुख कवि-संत माने जाते हैं।

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