असतो मा सद्गमय — मंत्र अर्थ सहित

यह बृहदारण्यक उपनिषद का प्रसिद्ध मंत्र है, जिसे पवमान मंत्र भी कहते हैं। इसमें तीन सुंदर प्रार्थनाएँ हैं — असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो। स्कूलों, सभाओं और दीप जलाते समय इसे बहुत बोला जाता है।

1 मंत्र · लगभग 1 मिनट

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असतो मा सद्गमय किस ग्रंथ से है?

यह बृहदारण्यक उपनिषद (अध्याय 1, ब्राह्मण 3, मंत्र 28) से है, जो शुक्ल यजुर्वेद से जुड़ा उपनिषद है।

यह मंत्र कब बोलना चाहिए?

पढ़ाई, सभा या किसी शुभ काम की शुरुआत में, दीप जलाते समय, और ध्यान से पहले या बाद में।

इसे कितनी बार बोलें?

सामान्यतः एक या तीन बार। अंत में 'शान्तिः' तीन बार बोला जाता है — परंपरा में तीनों प्रकार की बाधाओं से शांति के लिए।

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