महाशिवरात्रि व्रत कैसे रखें: चार प्रहर पूजा, क्या खाएँ और व्रत कब खोलें

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संक्षेप में: महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी (दक्षिण भारत की गणना में माघ) को भगवान शिव के लिए मनाई जाती है। भक्त दिन भर व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाते हैं और रात भर जागरण करके चार प्रहर में पूजा व 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हैं। व्रत अगली सुबह स्नान-पूजा के बाद, पंचांग में दिए पारण समय में खोला जाता है।

एक नज़र में

तिथि
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फ़रवरी–मार्च)
मुख्य पूजा
रात्रि के चार प्रहर; निशीथ काल (आधी रात)
मंत्र
ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र
पारण
अगली सुबह, पंचांग के समय में

महाशिवरात्रि व्रत की विधि

  1. एक दिन पहले (त्रयोदशी) सादा, एक समय भोजन करें।
  2. शिवरात्रि की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  3. मंदिर या घर में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें; बेलपत्र, धतूरा, भांग के पत्ते, सफ़ेद फूल और चंदन अर्पित करें।
  4. दिन भर नाम-जाप, शिव चालीसा या शिव पुराण का पाठ करें।
  5. रात को जागरण करें: हर प्रहर (लगभग तीन घंटे) में एक बार पूजा, अभिषेक और आरती करें। न हो सके तो कम से कम एक बार रात में, ख़ासकर निशीथ काल में, पूजा करें।
  6. अगली सुबह स्नान-पूजा के बाद, पंचांग के पारण समय में प्रसाद लेकर व्रत खोलें।

व्रत में क्या खाएँ (प्रचलित)

  • निर्जला (कठोर) या केवल जल
  • फल, दूध, दही, मखाना, मेवे
  • साबूदाना, आलू, शकरकंद, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक

क्या करें

  • अपनी सेहत के अनुसार व्रत का प्रकार चुनें।
  • मंदिर में भीड़ हो तो धैर्य रखें और कतार में रहें।
  • जागरण में भजन, कथा और जाप करें; फ़ोन और व्यर्थ बातों से बचें।

क्या न करें

  • अनाज, चावल, दाल, प्याज़-लहसुन, मांस और शराब न लें।
  • भांग का सेवन नशे के लिए न करें; भांग के पत्ते केवल पूजा में अर्पित किए जाते हैं।
  • शिवलिंग पर तुलसी, केतकी का फूल, हल्दी और कुमकुम न चढ़ाएँ (प्रचलित परंपरा)।
  • पारण का समय बीत जाने न दें।

पूजा और पारण के नियम क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हैं; अपने शहर का पंचांग और परिवार की परंपरा मानें। बीमार, गर्भवती और बुज़ुर्ग डॉक्टर की सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाशिवरात्रि का व्रत कब खोलें?

अगली सुबह सूर्योदय के बाद, स्नान-पूजा करके, पंचांग में दिए पारण समय में।

क्या रात भर जागना ज़रूरी है?

परंपरा में जागरण का बड़ा महत्व है, पर सेहत के अनुसार करें। कम से कम आधी रात (निशीथ काल) की पूजा करने की कोशिश करें।

शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी 'मासिक शिवरात्रि' है; फाल्गुन की शिवरात्रि सबसे बड़ी होने के कारण महाशिवरात्रि कहलाती है।

क्या महाशिवरात्रि व्रत में पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे। ज़्यादातर भक्त जल और फलाहार के साथ व्रत रखते हैं।

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