करवा चौथ व्रत कैसे रखें: सरगी से चाँद को अर्घ्य तक
संक्षेप में: करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु की कामना से रखती हैं, ख़ासकर उत्तर भारत में। सूर्योदय से पहले सास की दी हुई सरगी खाकर दिन भर निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को करवा माता, गौरी-शिव और गणेश की पूजा और कथा होती है। चाँद निकलने पर उसे जल का अर्घ्य देकर, छलनी से चाँद और फिर पति को देखकर, पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोला जाता है।
एक नज़र में
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (अक्टूबर–नवंबर)
- सरगी
- सूर्योदय से पहले, सास की ओर से
- पूजा
- करवा माता, गौरी, शिव, गणेश, कार्तिकेय
- व्रत खोलना
- चंद्रोदय के बाद, अर्घ्य देकर
करवा चौथ की विधि
- सूर्योदय से पहले स्नान करके सरगी खाएँ: फल, मेवे, मिठाई, फेनी और पानी; फिर व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर निर्जला व्रत रखें, अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए।
- शाम को सोलह शृंगार करके, करवा (मिट्टी का टोंटीदार लोटा) में जल भरकर पूजा की थाली सजाएँ।
- दीवार पर या तस्वीर में करवा माता और गौरी-शिव की पूजा करें, करवा चौथ की कथा सुनें; कई जगह महिलाएँ मिलकर थाली फेरती हैं।
- चाँद निकलने पर करवे के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें, दीपक जलाकर छलनी से पहले चाँद, फिर पति को देखें।
- पति के हाथ से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें, फिर सादा भोजन करें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
क्या करें
- सरगी में पानी और पौष्टिक चीज़ें लें ताकि दिन भर ताक़त रहे।
- अपने शहर का चंद्रोदय समय देखें; बादल हों तो परिवार की परंपरा अनुसार चाँद की दिशा में अर्घ्य दें।
- बड़ों का आशीर्वाद लें और सास को बया (उपहार) दें, जहाँ यह परंपरा है।
क्या न करें
- गर्भावस्था, मधुमेह या किसी बीमारी में निर्जला व्रत डॉक्टर की सलाह के बिना न रखें; फलाहार या जल के साथ व्रत भी किया जा सकता है।
- कई परिवार इस दिन कैंची-सुई का काम नहीं करते और सोते नहीं।
- चाँद देखने से पहले व्रत न तोड़ें, जब तक सेहत के लिए ज़रूरी न हो।
करवा चौथ के नियम क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हैं। अपनी परंपरा मानें। स्वास्थ्य पहले है; कथामंत्र किसी विशेष फल का वादा नहीं करता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरगी कब खानी चाहिए?
सूर्योदय से पहले, आमतौर पर सुबह 4 से 5 बजे के बीच, स्नान के बाद।
क्या करवा चौथ में पानी पी सकते हैं?
परंपरा में यह निर्जला व्रत है, पर सेहत की वजह से कई महिलाएँ जल या फलाहार के साथ व्रत रखती हैं।
चाँद न दिखे तो व्रत कैसे खोलें?
पंचांग के चंद्रोदय समय के बाद चाँद की दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोलें; कुछ परिवार भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा की पूजा करते हैं।
छलनी से चाँद क्यों देखते हैं?
यह लोक परंपरा है जो वीरावती की कथा से जुड़ी मानी जाती है। इसका भाव श्रद्धा और प्रेम है।
क्या अविवाहित लड़कियाँ करवा चौथ रख सकती हैं?
कई अविवाहित लड़कियाँ भी यह व्रत रखती हैं; कुछ परिवारों में वे तारों को देखकर व्रत खोलती हैं। अपने परिवार की परंपरा मानें।