छठ पूजा कैसे करें: चार दिन की विधि, प्रसाद और नियम
संक्षेप में: छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की चार दिन की पूजा है, जो मुख्य रूप से कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। खरना के बाद व्रती लगभग 36 घंटे निर्जला व्रत रखते हैं।
एक नज़र में
- कब
- कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी (दिवाली के बाद); चैत्र में चैती छठ
- देवता
- सूर्य देव और छठी मैया
- व्रत
- खरना के बाद लगभग 36 घंटे निर्जला
- प्रसाद
- ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल, सूप-दउरा में
छठ के चार दिन
- पहला दिन, नहाय-खाय: नदी या घर पर स्नान करके घर की सफ़ाई; व्रती सेंधा नमक वाला सादा भोजन (कद्दू-भात, चना दाल) एक बार खाते हैं।
- दूसरा दिन, खरना: दिन भर व्रत के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है; व्रती यही प्रसाद लेते हैं और इसके बाद निर्जला व्रत शुरू होता है।
- तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य: ठेकुआ और प्रसाद बनाकर सूप-दउरा सजाए जाते हैं; शाम को घाट पर जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- चौथा दिन, उषा अर्घ्य: भोर में फिर घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- अर्घ्य के बाद व्रती प्रसाद और जल लेकर व्रत खोलते हैं (पारण) और सबको प्रसाद बाँटा जाता है।
क्या करें
- प्रसाद बनाने में पूरी शुद्धता रखें: साफ़ बर्तन, नया या धुला चूल्हा, स्नान के बाद ही रसोई।
- व्रती ज़मीन पर चटाई बिछाकर सोते हैं (प्रचलित परंपरा)।
- घाट पर बच्चों और बुज़ुर्गों का ध्यान रखें; गहरे पानी में न जाएँ।
- छठ के लोकगीत गाएँ और व्रती की सेवा करें।
क्या न करें
- इन दिनों घर में प्याज़, लहसुन, मांस और शराब न बनाएँ, न लाएँ।
- प्रसाद को बिना हाथ धोए न छुएँ और पहले चखें नहीं।
- घाट और नदी में गंदगी या प्लास्टिक न छोड़ें।
- बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग डॉक्टर की सलाह के बिना 36 घंटे का निर्जला व्रत न रखें; परिवार का कोई और सदस्य व्रत रख सकता है।
छठ की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार थोड़ी अलग होती है। अपने घर के बड़ों की परंपरा मानें। स्वास्थ्य और घाट पर सुरक्षा पहले रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
छठ पूजा में कितने दिन व्रत रखते हैं?
पूजा चार दिन की है। खरना की शाम के प्रसाद के बाद से उषा अर्घ्य तक लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है।
खरना क्या है?
छठ का दूसरा दिन, जब शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद चढ़ाकर व्रती ग्रहण करते हैं।
क्या घर पर छठ का अर्घ्य दे सकते हैं?
हाँ, घाट न जा सकें तो कई परिवार छत या आँगन में पानी का छोटा कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं।
क्या पुरुष छठ व्रत रख सकते हैं?
हाँ, बहुत से पुरुष भी छठ व्रत रखते हैं।
ठेकुआ क्या है?
गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बनी, घी में तली मीठी पकवान, जो छठ का मुख्य प्रसाद है।