शुभं करोति कल्याणम् — दीपक मंत्र अर्थ सहित
यह संध्या के समय घर में दीपक जलाते हुए बोला जाने वाला प्रसिद्ध मंत्र है। इसमें दीपक की ज्योति को प्रणाम किया जाता है, जो परंपरा में शुभता, कल्याण और अच्छे विचारों का प्रतीक है। दूसरे श्लोक में दीप ज्योति को परब्रह्म और जनार्दन का रूप कहा गया है।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
अर्थ
पद 1
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
जो शुभ और कल्याण करती है, जो आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक है, और जो मन से शत्रुता के भाव मिटाती है — हे दीप ज्योति, आपको नमस्कार है।
पद 2
दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
दीपक की ज्योति परब्रह्म है, दीपक की ज्योति ही भगवान जनार्दन है। यह दीपक मेरे पाप दूर करे — हे दीप ज्योति, आपको नमस्कार है।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शुभं करोति मंत्र कब बोलें?
शाम को संध्या के समय, घर के मंदिर में या तुलसी के पास दीपक जलाते हुए। कई लोग सुबह की पूजा में भी बोलते हैं।
इसे कितनी बार बोलें?
दीपक जलाते समय एक बार दोनों श्लोक बोलना परंपरा है। बच्चे इसे रोज़ शाम को बोलना सीखते हैं।
'शत्रुबुद्धिविनाशाय' का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है 'शत्रुता की बुद्धि का नाश करने के लिए' — यानी मन से बैर और बुरे विचार दूर हों।