नवग्रह मंत्र — अर्थ सहित
यह एक ही श्लोक में त्रिदेव और नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — को याद करने वाला प्रसिद्ध मंत्र है। सुबह की प्रार्थना और पूजा में इसे बोलकर प्रार्थना की जाती है कि सब ग्रह और देवता शांति देने वाले हों, ताकि दिन शुभ बीते।
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥
अर्थ
पद 1
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥
ब्रह्मा, विष्णु (मुरारी), शिव (त्रिपुरारी), सूर्य, चंद्रमा, मंगल (भूमि-पुत्र), बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु — ये सभी ग्रह और देव हमें शांति देने वाले हों।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवग्रह मंत्र कब बोलना चाहिए?
रोज़ सुबह की प्रार्थना में, किसी भी पूजा की शुरुआत में, और नवग्रह मंदिर में दर्शन करते समय।
इसे कितनी बार बोलें?
एक या तीन बार बोलना आम है। कुछ भक्त इसे 9 बार (हर ग्रह के लिए एक) या 108 बार भी बोलते हैं।
इस मंत्र में किन-किन का नाम है?
पहले त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश — और फिर नौ ग्रह: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु।