अध्याय 7 · ज्ञानविज्ञान योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 7, श्लोक 25 — योगमाया का परदा
नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः। मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ॥
nāhaṃ prakāśaḥ sarvasya yogamāyāsamāvṛtaḥ | mūḍho'yaṃ nābhijānāti loko māmajamavyayam ||
अर्थ
अपनी योगमाया से ढका होने के कारण मैं सबके सामने प्रकट नहीं होता। यह मोहित संसार मुझ अजन्मा और अविनाशी को नहीं पहचानता।