अध्याय 18 · मोक्षसंन्यास योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 18, श्लोक 47 — अपना धर्म श्रेष्ठ
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् ॥
śreyānsvadharmo viguṇaḥ paradharmātsvanuṣṭhitāt | svabhāvaniyataṃ karma kurvannāpnoti kilbiṣam ||
अर्थ
अच्छी तरह निभाए गए दूसरे के धर्म से अपना धर्म बेहतर है, भले ही उसमें कमियाँ हों। अपने स्वभाव के अनुसार नियत कर्म करते हुए मनुष्य पाप का भागी नहीं होता।
आज के जीवन में
दूसरों की नकल करके चमकने से अच्छा है अपनी प्रकृति के अनुसार काम चुनना — भले शुरू में वह कम परफ़ेक्ट लगे।