आरती श्री वृषभानुसुता की — अर्थ सहित

वृषभानुसुता यानी राजा वृषभानु की बेटी — श्री राधा रानी। यह आरती राधा जी को श्रीकृष्ण के प्रेम की मूर्ति, वृंदावन में विहार करने वाली और जगत की माता के रूप में गाती है। गीता प्रेस की आरती-संग्रह पुस्तकों में छपी यह आरती राधा अष्टमी, जन्माष्टमी और रोज़ की युगल पूजा में गाई जाती है।

5 पद · लगभग 3 मिनट

आरती श्री वृषभानुसुता की। मंजुल मूर्ति मोहन ममता की॥

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि। पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की॥

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि। अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिता की॥

संतत सेव्य संत मुनि जन की, आकर अमित दिव्यगुन गन की। आकर्षिणी कृष्ण तन मन की, अति अमूल्य सम्पति समता की॥

कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि। जगज्जननि जग दुःखनिवारिणि, आदि अनादिशक्ति विभुता की॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वृषभानुसुता' का अर्थ क्या है?

वृषभानु की सुता यानी बेटी। राधा जी बरसाना के राजा वृषभानु और माता कीर्ति की पुत्री मानी जाती हैं।

राधा जी की आरती कब गाई जाती है?

रोज़ की राधा-कृष्ण पूजा में, और खासकर भाद्रपद शुक्ल अष्टमी (राधा अष्टमी) और जन्माष्टमी पर।

ललिता सखी कौन हैं?

ललिता जी राधा रानी की प्रमुख सखियों (अष्टसखियों) में सबसे आगे मानी जाती हैं।

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