काली माता की आरती — अर्थ सहित

माँ काली शक्ति की सबसे प्रबल देवी हैं। वे अज्ञान और अहंकार का नाश करने वाली और भक्तों की रक्षा करने वाली हैं। यह आरती शनिवार और अमावस्या पर विशेष रूप से गाई जाती है।

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जय काली माता, जय काली माता। श्याम रंग तन, मुंड की माला। रक्त जिह्वा, त्रिशूल धारी। जय काली माता, जय काली माता॥

शव पर नाचे काली माता। भैरव संग रहे विख्याता। शक्ति रूप तुम जग की दाता। जय काली माता, जय काली माता॥

दुष्ट दलन करि अभय दिलावे। भक्तों के सब संकट नशावे। महिषासुर को मार गिरावे। जय काली माता, जय काली माता॥

काशी में विराजे महाकाली। कलकत्ता में करे सब खाली। दक्षिणा काली अति रखवाली। जय काली माता, जय काली माता॥

काली की आरती जो नर गावे। सकल मनोरथ सिद्धि पावे। माँ की कृपा निरन्तर पावे। जय काली माता, जय काली माता॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काली माता की पूजा कब करें?

काली माता की पूजा शनिवार, अमावस्या और नवरात्रि में विशेष रूप से की जाती है। रात्रि की पूजा अत्यंत फलदायक मानी जाती है।

काली माता का प्रसाद क्या होता है?

काली माता को लाल फूल, हिबिस्कस, नीम के पत्ते और मिठाई चढ़ाई जाती है। कुछ परंपराओं में पंचामृत भी चढ़ाया जाता है।

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