होली 2026: होलिका दहन विधि, रंग कैसे खेलें और क्या करें

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संक्षेप में: होली दो दिन का त्योहार है। पहले दिन (फाल्गुन पूर्णिमा) होलिका दहन होता है — बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक। दूसरे दिन रंगवाली होली — सभी मिलकर गुलाल और रंग से खेलते हैं।

एक नज़र में

तिथि 2026
होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (अनुमानित); धुलेंडी: 4 मार्च 2026
होलिका दहन मुहूर्त
भद्रा समाप्ति के बाद प्रदोष काल में — सटीक समय पंचांग से जाँचें
देवता
भगवान विष्णु (नरसिंह रूप), कृष्ण-राधा
तिथि
फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (रंगवाली होली)

होलिका दहन विधि

  1. होलिका दहन से कुछ दिन पहले चौराहे या खुले स्थान पर लकड़ी, घास और गोबर के उपले इकट्ठा करना शुरू करें।
  2. होलिका दहन के दिन भद्रा समाप्ति के बाद प्रदोष काल में होलिका जलाएँ। भद्रा में दहन अशुभ माना जाता है।
  3. होलिका की परिक्रमा करें — तीन या पाँच बार। परिक्रमा करते समय कच्चे सूत का धागा होलिका पर लपेटें।
  4. होलिका में गेहूँ की बालियाँ, नारियल और गोबर के उपले डालें। नए अनाज को आग में सेंककर प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
  5. भगवान नरसिंह और विष्णु की स्तुति करें, प्रह्लाद की कथा पढ़ें।
  6. अगले दिन सुबह होलिका की राख को माथे पर लगाएँ — यह शुभ और पवित्र माना जाता है।

रंगवाली होली — क्या करें

  • सुबह बड़े-बुज़ुर्गों को प्रणाम करके उनके साथ होली खेलें।
  • प्राकृतिक, हर्बल रंग (टेसू के फूल, हल्दी, चंदन से बने) उपयोग करें — केमिकल रंग त्वचा और आँखों को नुकसान पहुँचाते हैं।
  • गुजिया, ठंडाई, पूरनपोली और दही-बड़ा का लुत्फ़ उठाएँ।
  • शाम को स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और गणेश जी-हनुमान जी को रंग-गुलाल चढ़ाएँ।
  • बड़े-बुज़ुर्गों और पड़ोसियों को मिठाई दें।
  • बृज (मथुरा-वृंदावन) में लठमार होली का विशेष महत्व है — यहाँ की होली 10-15 दिन पहले से शुरू हो जाती है।

होली की कथा — प्रह्लाद और होलिका

हिरण्यकशिपु नामक राक्षस राज ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोका। जब सभी उपाय विफल हो गए, तो उसने अपनी बहन होलिका को — जिसे अग्नि में न जलने का वरदान था — प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। परंतु होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए। यह घटना बुराई पर भक्ति और अच्छाई की जीत का प्रतीक बन गई।

होलिका दहन का सटीक मुहूर्त भद्रा और पूर्णिमा तिथि के अनुसार बदलता है। स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होली पर क्या न करें?

केमिकल रंग न उपयोग करें। शराब और नशे से दूर रहें। किसी को ज़बरदस्ती रंग न लगाएँ — होली सहमति से खेली जाती है। गर्भवती, बुजुर्ग और बीमार लोगों पर रंग न फेंकें।

बृज की होली इतनी खास क्यों है?

भगवान श्रीकृष्ण बृज (मथुरा-वृंदावन) में पले-बढ़े। वे राधा और गोपियों के साथ यहाँ होली खेलते थे। इसीलिए बृज की होली विश्व-प्रसिद्ध है — लठमार होली (नंदगाँव-बरसाना), फूलों की होली (वृंदावन), और रंगनाथ जी की होली इसकी विशेषताएँ हैं।

ठंडाई क्या होती है?

ठंडाई होली का पारंपरिक पेय है — दूध, बादाम, पिस्ता, खरबूज़ के बीज, गुलाब की पंखुड़ियाँ, काली मिर्च और सौंफ से बना शीतल पेय। यह पाचक और तासीर में ठंडा होता है।

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