गणेश चतुर्थी 2026: पूजा विधि, 21 पत्ते, चंद्र-दर्शन निषेध और विसर्जन
संक्षेप में: गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की स्थापना करें, 21 दूर्वा और 21 प्रकार के पत्ते चढ़ाएँ, मोदक का भोग लगाएँ और चंद्रमा न देखें। 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी को विसर्जन करें।
एक नज़र में
- तिथि 2026
- अनुमानित: 14 अगस्त 2026 (स्थानीय पंचांग से जाँचें)
- देवता
- भगवान गणेश (गणपति, विनायक)
- तिथि
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
- विसर्जन
- अनंत चतुर्दशी — 10वें दिन
- प्रमुख प्रसाद
- मोदक (उकडिचे मोदक या बेसन लड्डू)
गणेश चतुर्थी पूजा विधि
- चतुर्थी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।
- गणेश जी की मूर्ति — मिट्टी की, पर्यावरण-अनुकूल — लाल कपड़े पर स्थापित करें। मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
- प्राण-प्रतिष्ठा: 'गणपतिर्द्वारमास्थाय...' मंत्र से आवाहन करें और मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठा करें।
- षोडशोपचार पूजन करें — गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजा करें।
- 21 दूर्वा (दूब घास) और 21 प्रकार के पत्ते (बेल, तुलसी, शमी, केले के पत्ते आदि) चढ़ाएँ — यह गणेश जी को सर्वाधिक प्रिय है।
- 21 मोदक (भाप में पके या बेसन के) का भोग लगाएँ।
- गणेश चालीसा और गणेश आरती का पाठ करें।
- प्रसाद में मोदक, लड्डू और फल बाँटें।
- 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी को ढोल-नगाड़ों के साथ 'गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या' कहते हुए विसर्जन करें।
चंद्र-दर्शन निषेध — चतुर्थी को चाँद क्यों न देखें?
एक बार गणेश जी चंद्रमा की सवारी कर रहे थे। चंद्रमा ने उनके विशाल पेट और चूहे की सवारी देखकर हँसी उड़ाई। गणेश जी ने क्रोधित होकर शाप दिया — जो कोई भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा देखेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा। इसीलिए इस दिन चंद्र-दर्शन वर्जित है।
यदि ग़लती से चाँद दिख जाए तो 'सिंहः प्रसेनमवधीत्...' मंत्र का जाप करें।
तिथि और मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें। पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की मूर्ति का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश जी को कौन-से फूल चढ़ाएँ?
गणेश जी को लाल और पीले रंग के फूल — गेंदा, कनेर, लाल पुष्प — प्रिय हैं। तुलसी और दूर्वा अवश्य चढ़ाएँ। केतकी के फूल न चढ़ाएँ।
पर्यावरण-अनुकूल गणेश मूर्ति कैसे चुनें?
कच्ची मिट्टी की मूर्ति चुनें जो पानी में घुल जाए। रासायनिक रंगों से रंगी प्लास्टर-ऑफ-पेरिस (PoP) की मूर्तियाँ जलाशयों को प्रदूषित करती हैं।
घर पर 1.5 दिन का विसर्जन क्या होता है?
कुछ परिवार चतुर्थी के अगले दिन (पंचमी के सुबह) ही विसर्जन कर देते हैं — इसे 'डेढ़ दिन का गणपति' कहते हैं। 10 दिन रखना परंपरा है, लेकिन 1.5, 3, 5 या 7 दिन का विसर्जन भी होता है।