कलावा या मौली कैसे बाँधें: किस हाथ में, कितनी बार और कब उतारें

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संक्षेप में: कलावा या मौली लाल-पीले सूती धागे का रक्षासूत्र है, जो पूजा, हवन या किसी शुभ काम के समय कलाई पर बाँधा जाता है। परंपरा के अनुसार पुरुष और अविवाहित लड़कियाँ दाहिने हाथ में, और विवाहित महिलाएँ बाएँ हाथ में बँधवाती हैं। इसे आमतौर पर तीन बार लपेटा जाता है और बाँधते समय मुट्ठी में सिक्का या अक्षत रखकर, मंत्र के साथ बाँधा जाता है।

एक नज़र में

धागा
लाल-पीला सूती धागा (कहीं-कहीं केवल लाल)
हाथ
पुरुष और अविवाहित लड़कियाँ: दाहिना; विवाहित महिलाएँ: बायाँ
लपेटे
आमतौर पर 3 (कुछ परिवार 5 या 7)
कौन बाँधे
पुरोहित, घर के बड़े, या ख़ुद पूजा के बाद

कलावा बाँधने की विधि

  1. पूजा या शुभ काम के समय, स्नान के बाद, कलावा भगवान को अर्पित करें।
  2. जिसे कलावा बँधवाना है, वह अपनी मुट्ठी में एक सिक्का या थोड़े अक्षत (चावल) रखकर हाथ आगे करे; दूसरा हाथ सिर पर रखे।
  3. बाँधने वाला व्यक्ति कलावे को कलाई पर तीन बार लपेटे और रक्षासूत्र मंत्र बोले।
  4. दो गाँठें लगाएँ, बहुत कसकर नहीं।
  5. बँधवाने वाला व्यक्ति सिक्का या दक्षिणा पुरोहित को दे, या पूजा की थाली में रख दे।

रक्षासूत्र मंत्र

कलावा बाँधते समय यह मंत्र बोला जाता है: 'येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥' सरल अर्थ: जिस रक्षासूत्र से महाबली दानवराज बलि बाँधे गए थे, उसी से मैं तुम्हें बाँधता हूँ; हे रक्षे, तुम अडिग रहना। मंत्र न आता हो तो भगवान का नाम लेकर भी बाँध सकते हैं।

क्या करें

  • कलावा साफ़ रखें; बहुत गंदा या फीका हो जाए तो बदल दें।
  • पुराना कलावा उतारकर बहते जल में प्रवाहित करें, या पीपल या किसी पेड़ की जड़ के पास रख दें।
  • कई परिवार पुराना कलावा मंगलवार या शनिवार को उतारकर उसी दिन नया बाँधते हैं।

क्या न करें

  • पुराने कलावे को कूड़े में न फेंकें।
  • बहुत कसकर न बाँधें कि खून का बहाव रुके या त्वचा कटे।
  • उतारे हुए कलावे को दोबारा न पहनें।
  • प्लास्टिक या सिंथेटिक धागे की जगह सूती धागा ही प्रयोग करें।

हाथ, लपेटों की संख्या और उतारने के दिन क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग होते हैं। अपने परिवार और पुरोहित की परंपरा मानें। कथामंत्र कलावे से किसी विशेष फल का दावा नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलावा किस हाथ में बाँधें?

परंपरा के अनुसार पुरुष और अविवाहित लड़कियाँ दाहिने हाथ में, विवाहित महिलाएँ बाएँ हाथ में बाँधती हैं। कुछ परिवारों में सभी दाहिने हाथ में बाँधते हैं।

कलावा कितनी बार लपेटें?

आमतौर पर तीन बार। कुछ परिवार पाँच या सात बार लपेटते हैं।

पुराना कलावा कब उतारें?

जब वह गंदा या फीका हो जाए। कई परिवार मंगलवार या शनिवार को उतारते हैं। अगले शुभ अवसर पर नया बाँध लें।

क्या ख़ुद कलावा बाँध सकते हैं?

हाँ, घर की पूजा के बाद भगवान को अर्पित करके ख़ुद या घर के किसी बड़े से बँधवा सकते हैं।

पुराने कलावे का क्या करें?

उसे बहते जल में प्रवाहित करें या किसी पेड़ की जड़ के पास रख दें। कूड़े में न फेंकें।

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