जनेऊ (यज्ञोपवीत) कैसे पहनें, कब बदलें और क्या नियम मानें

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संक्षेप में: जनेऊ या यज्ञोपवीत तीन धागों वाला पवित्र सूत्र है, जो उपनयन संस्कार में गुरु या पुरोहित द्वारा पहनाया जाता है। इसे बाएँ कंधे के ऊपर से दाहिनी भुजा के नीचे तक पहना जाता है। शौच के समय इसे दाहिने कान पर लपेटा जाता है। जन्म-मृत्यु के सूतक के बाद, धागा टूटने पर और हर साल श्रावणी पूर्णिमा पर नया जनेऊ मंत्र के साथ धारण किया जाता है।

एक नज़र में

धागे
तीन धागे, ब्रह्मगाँठ से बँधे
पहनने का तरीक़ा
बाएँ कंधे पर, दाहिनी भुजा के नीचे (सव्य/उपवीती)
कब मिलता है
उपनयन संस्कार में
वार्षिक बदलाव
श्रावणी पूर्णिमा (उपाकर्म)

धारण मंत्र

नया जनेऊ पहनते समय यह मंत्र बोला जाता है: 'यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥' सरल अर्थ: यह यज्ञोपवीत परम पवित्र है, जो आदि से प्रजापति के साथ जुड़ा है; इस शुभ्र सूत्र को धारण करता हूँ, यह मुझे बल और तेज दे। मंत्र और विधि अपने पुरोहित से सीखें।

नया जनेऊ कैसे बदलें

  1. स्नान करके साफ़ जगह पर पूर्व की ओर मुँह करके बैठें।
  2. नए जनेऊ पर गंगाजल छिड़कें और भगवान का स्मरण करें; कई लोग गायत्री मंत्र का जाप करते हैं।
  3. धारण मंत्र बोलते हुए नया जनेऊ सिर के ऊपर से बाएँ कंधे पर पहनें।
  4. फिर पुराना जनेऊ नीचे की ओर (पैरों की तरफ़) से उतारें।
  5. पुराने जनेऊ को बहते जल में प्रवाहित करें या किसी पेड़ की जड़ के पास साफ़ जगह रख दें।

क्या करें

  • मल-मूत्र त्याग के समय जनेऊ को दाहिने कान पर दो बार लपेट लें, फिर हाथ धोकर उतारें।
  • पितृ कार्य (श्राद्ध, तर्पण) में जनेऊ को दाहिने कंधे पर किया जाता है (अपसव्य); कार्य के बाद फिर बाएँ कंधे पर करें।
  • जनेऊ को साफ़ रखें और गंदा या टूटा हो तो बदल दें।
  • रोज़ संध्या या कम से कम गायत्री मंत्र का जाप करने का प्रयास करें।

क्या न करें

  • जनेऊ को कपड़ों के ऊपर गले में लटकाकर न रखें और खूँटी पर टाँगकर न छोड़ें।
  • टूटा हुआ जनेऊ पहने न रहें; तुरंत नया पहनें।
  • शौच के समय जनेऊ को कान पर चढ़ाना न भूलें।
  • बिना स्नान के नया जनेऊ धारण न करें।

जनेऊ कब बदलें

  • हर साल श्रावणी पूर्णिमा (उपाकर्म) पर।
  • परिवार में जन्म या मृत्यु का सूतक पूरा होने पर।
  • धागा टूट जाने या बहुत गंदा हो जाने पर।
  • कई परिवारों में ग्रहण के बाद भी।

जनेऊ की विधि और नियम क्षेत्र, वेद-शाखा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं। अपने पुरोहित और परिवार की परंपरा का पालन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनेऊ किस कंधे पर पहनते हैं?

सामान्य रूप से बाएँ कंधे पर, ताकि यह दाहिनी भुजा के नीचे से जाए। पितृ कार्य में इसे दाहिने कंधे पर किया जाता है।

शौच के समय जनेऊ कान पर क्यों लपेटते हैं?

परंपरा के अनुसार इससे पवित्र सूत्र अशुद्ध होने से बचता है और यह नियम याद रखने का एक तरीक़ा भी है।

जनेऊ टूट जाए तो क्या करें?

स्नान करके मंत्र के साथ नया जनेऊ पहन लें और पुराने को बहते जल में प्रवाहित करें या पेड़ के पास रख दें।

नया जनेऊ कब पहनते हैं?

हर साल श्रावणी पूर्णिमा पर, सूतक के बाद और धागा टूटने पर।

जनेऊ के तीन धागे किसके प्रतीक हैं?

प्रचलित मान्यता में इन्हें देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण की याद माना जाता है। कुछ लोग इन्हें ब्रह्मा, विष्णु, महेश या तीन गुणों से भी जोड़ते हैं।

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