माला से 108 जाप कैसे करें: किस उँगली से, सुमेरु का नियम और बैठने का तरीक़ा
संक्षेप में: जाप माला में 108 मनके और एक बड़ा मनका (सुमेरु) होता है। माला को दाहिने हाथ की मध्यमा (बीच की उँगली) पर रखकर अँगूठे से एक-एक मनका अपनी ओर खींचा जाता है; तर्जनी उँगली माला को नहीं छूती। हर मनके पर एक बार मंत्र बोलें। सुमेरु तक पहुँचकर उसे लाँघते नहीं, माला पलटकर उल्टी दिशा में अगली माला शुरू करते हैं। साफ़ आसन पर सीधी पीठ से बैठें।
एक नज़र में
- मनके
- 108 + 1 सुमेरु (गुरु मनका)
- हाथ
- दाहिना हाथ, हृदय के पास
- उँगलियाँ
- मध्यमा पर माला, अँगूठे से फेरें; तर्जनी अलग
- माला
- रुद्राक्ष (शिव), तुलसी (विष्णु/कृष्ण), चंदन, स्फटिक
माला जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ आसन (कुश, ऊन या कपड़े) पर पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके सुखासन या पद्मासन में बैठें। पीठ सीधी रखें।
- भगवान का स्मरण करें और मन में संकल्प लें कि कितनी माला जपेंगे।
- माला को दाहिने हाथ की मध्यमा उँगली पर लटकाएँ, सुमेरु के पास वाले मनके से शुरू करें।
- अँगूठे से एक मनका अपनी ओर खींचें और एक बार मंत्र बोलें। तर्जनी को माला से दूर रखें।
- 108 मनके पूरे होने पर सुमेरु आएगा। उसे न लाँघें; माला को पलटकर उसी दिशा से वापस अगली माला शुरू करें।
- जाप पूरा होने पर माला को माथे से लगाएँ, प्रणाम करें और गोमुखी या साफ़ डिब्बी में रख दें।
जाप के तीन तरीक़े
परंपरा में जाप तीन तरह से होता है: वाचिक (ज़ोर से बोलकर), उपांशु (होंठ हिलाकर धीमे स्वर में, जो दूसरों को सुनाई न दे) और मानसिक (मन में)। शुरुआत में वाचिक या उपांशु आसान है; मन लगने के साथ मानसिक जाप भी कर सकते हैं।
क्या करें
- रोज़ एक ही समय और एक ही जगह जाप करने की कोशिश करें।
- माला को गोमुखी (जप-थैली) में रखकर जाप करें, या कपड़े से ढककर।
- जाप की माला केवल जाप के लिए रखें।
- अगर माला न हो तो हमारे ऑनलाइन जाप काउंटर से भी गिनती कर सकते हैं।
क्या न करें (प्रचलित नियम)
- माला को ज़मीन पर न रखें और पैरों से न छुआएँ।
- सुमेरु मनके को न लाँघें।
- जाप के बीच बातचीत या फ़ोन से बचें।
- अपनी जाप माला किसी और को जाप के लिए न दें।
- माला को नाभि से नीचे न लटकाएँ; हाथ हृदय के पास रखें।
उँगलियों, आसन और माला के नियम संप्रदाय और गुरु के अनुसार अलग हो सकते हैं। दीक्षा ली है तो गुरु के बताए नियम मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माला जाप में तर्जनी उँगली क्यों नहीं लगाते?
परंपरा में तर्जनी को अहंकार या दूसरों की ओर इशारे से जोड़ा जाता है, इसलिए इसे माला से दूर रखते हैं।
सुमेरु को क्यों नहीं लाँघते?
सुमेरु को गुरु या भगवान का स्थान माना जाता है। इसलिए उसे लाँघने के बजाय माला पलट दी जाती है।
माला में 108 मनके ही क्यों?
108 को हिंदू परंपरा में पवित्र संख्या माना जाता है; इसके कई अर्थ बताए जाते हैं, जैसे 12 राशियाँ × 9 ग्रह या 27 नक्षत्र × 4 चरण।
क्या बिना माला के जाप कर सकते हैं?
हाँ। उँगलियों के पोरों पर गिनकर या जाप काउंटर से भी जाप किया जा सकता है। सबसे ज़रूरी है ध्यान और श्रद्धा।
जाप की माला गले में पहन सकते हैं?
कई परंपराओं में जाप माला को गले में नहीं पहनते, उसे थैली में रखते हैं। पहनने के लिए अलग माला रखें।