अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 9, श्लोक 33 — इस संसार में भजन

किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा। अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् ॥

kiṃ punarbrāhmaṇāḥ puṇyā bhaktā rājarṣayastathā | anityamasukhaṃ lokamimaṃ prāpya bhajasva mām ||

अर्थ

तो फिर पुण्यात्मा ब्राह्मणों और भक्त राजर्षियों का तो कहना ही क्या! इसलिए इस अस्थायी और दुख भरे संसार में आकर तुम मुझे भजो।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार