अध्याय 7 · ज्ञानविज्ञान योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 7, श्लोक 12 — तीन गुण भगवान से
ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये। मत्त एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि ॥
ye caiva sāttvikā bhāvā rājasāstāmasāśca ye | matta eveti tānviddhi na tvahaṃ teṣu te mayi ||
अर्थ
सात्विक, राजसिक और तामसिक — जितने भी भाव हैं, सब मुझसे ही उत्पन्न हैं, यह जानो। पर मैं उनमें नहीं हूं, वे मुझमें हैं।