अध्याय 6 · आत्मसंयम योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 6, श्लोक 15 — परम शांति

युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः। शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति ॥

yuñjannevaṃ sadātmānaṃ yogī niyatamānasaḥ | śāntiṃ nirvāṇaparamāṃ matsaṃsthāmadhigacchati ||

अर्थ

इस तरह सदा मन को परमात्मा में लगाते हुए, वश में किए मन वाला योगी मुझमें स्थित परम शांति — निर्वाण — को पाता है।

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