अध्याय 6 · आत्मसंयम योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 6, श्लोक 12 — एकाग्र मन
तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः। उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥
tatraikāgraṃ manaḥ kṛtvā yatacittendriyakriyaḥ | upaviśyāsane yuñjyādyogamātmaviśuddhaye ||
अर्थ
उस आसन पर बैठकर, मन को एकाग्र करके और मन व इंद्रियों की गतिविधियों को वश में करके, अंतःकरण की शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करे।