अध्याय 5 · कर्मसंन्यास योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 5, श्लोक 6 — कर्मयोग से संन्यास
संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः। योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति ॥
saṃnyāsastu mahābāho duḥkhamāptumayogataḥ | yogayukto munirbrahma nacireṇādhigacchati ||
अर्थ
हे महाबाहो, कर्मयोग के बिना संन्यास पाना कठिन है और दुख देता है। कर्मयोग में लगा हुआ मुनि जल्दी ही ब्रह्म को पा लेता है।