अध्याय 5 · कर्मसंन्यास योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 5, श्लोक 2 — कर्मयोग श्रेष्ठ है

श्रीभगवानुवाच। संन्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ। तयोस्तु कर्मसंन्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते ॥

śrībhagavānuvāca | saṃnyāsaḥ karmayogaśca niḥśreyasakarāvubhau | tayostu karmasaṃnyāsātkarmayogo viśiṣyate ||

अर्थ

श्रीकृष्ण कहते हैं — कर्म-संन्यास और कर्मयोग, दोनों ही परम कल्याण की ओर ले जाते हैं। लेकिन इन दोनों में कर्मों को छोड़ देने से कर्मयोग श्रेष्ठ है।

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