अध्याय 4 · ज्ञानकर्मसंन्यास योग · श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं
गीता अध्याय 4, श्लोक 8 — हर युग में अवतार
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
paritrāṇāya sādhūnāṁ vināśāya ca duṣkṛtām | dharma-saṁsthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge ||
अर्थ
साधुओं की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ।
आज के जीवन में
सही के साथ खड़े होना हर युग की ज़रूरत है — आज के ऑफ़िस, कॉलेज और परिवार में भी।