अध्याय 4 · ज्ञानकर्मसंन्यास योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 4, श्लोक 2 — समय के साथ लुप्त ज्ञान
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः। स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥
evaṃ paramparāprāptamimaṃ rājarṣayo viduḥ | sa kāleneha mahatā yogo naṣṭaḥ parantapa ||
अर्थ
इस तरह परंपरा से मिले इस योग को राजर्षियों ने जाना। पर हे परंतप, बहुत समय बीतने से यह योग संसार से लुप्त हो गया।