अध्याय 2 · सांख्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 2, श्लोक 38 — जीत-हार में समभाव

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ। ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥

sukhaduḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau | tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpamavāpsyasi ||

अर्थ

सुख-दुख, लाभ-हानि और जीत-हार को समान मानकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ। ऐसा करने से तुम्हें पाप नहीं लगेगा।

आज के जीवन में

परीक्षा या खेल में पूरा प्रयास करें, पर परिणाम को अपने मन की शांति तय न करने दें।

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