अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 16, श्लोक 20 — नीचे गिरते जाना
आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि। मामप्राप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गतिम् ॥
āsurīṃ yonimāpannā mūḍhā janmani janmani | māmaprāpyaiva kaunteya tato yāntyadhamāṃ gatim ||
अर्थ
हे कौन्तेय, आसुरी योनियों में जन्म लेकर ये मूढ़ जन्म-जन्म तक मुझे नहीं पाते और उससे भी नीची गति में गिरते जाते हैं।