अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 16, श्लोक 14 — अहंकार की बातें

असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि। ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी ॥

asau mayā hataḥ śatrurhaniṣye cāparānapi | īśvaro'hamahaṃ bhogī siddho'haṃ balavānsukhī ||

अर्थ

'उस शत्रु को मैंने मार दिया, औरों को भी मारूँगा। मैं ही मालिक हूँ, मैं ही भोगने वाला, मैं सफल, बलवान और सुखी हूँ।'

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