अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 16, श्लोक 1 — दैवी गुण (1)
श्रीभगवानुवाच। अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥
śrībhagavānuvāca | abhayaṃ sattvasaṃśuddhirjñānayogavyavasthitiḥ | dānaṃ damaśca yajñaśca svādhyāyastapa ārjavam ||
अर्थ
श्रीकृष्ण कहते हैं: निडरता, मन की शुद्धता, ज्ञान और योग में स्थिरता, दान, इंद्रियों पर संयम, यज्ञ, शास्त्रों का अध्ययन, तप और सरलता —